भारत का ऊर्जा संकट: गैस उत्पादन में वृद्धि और नए आयात साझेदारों की खोज
Gyanhigyan April 04, 2026 03:43 AM
भारत की गैस उत्पादन रणनीति


भारत ने ईरान युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का सामना करने के लिए गैस के क्षेत्र में दोहरी रणनीति अपनाई है। देश ने न केवल नए आयात मार्गों की खोज की है, बल्कि स्वदेशी उत्पादन पर भी ध्यान केंद्रित किया है। FY 2025-26 की पहली छमाही में पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, भारत का एलपीजी उत्पादन 6219 TMT रहा है।

भारत ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने अरब सागर में दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से गैस उत्पादन शुरू कर दिया है।

इस परियोजना में लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश किया गया है, जो मुंबई से 180 किमी उत्तर-पश्चिम और गुजरात के पिपावाव से 80 किमी दक्षिण में स्थित है। B-12-24P से गैस की वाणिज्यिक आपूर्ति शुरू होने से भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा।

भारत ने नए आयात साझेदारों की तलाश शुरू की है। पहले, देश का गैस आयात मुख्य रूप से मध्य पूर्व से होता था, लेकिन युद्ध के कारण अब भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नार्वे और अर्जेंटीना जैसे देशों से गैस खरीद रहा है।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने भी गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं होने की जानकारी दी है। कंपनी के 55 बॉटलिंग प्लांटों से 1410000 सिलेंडरों की डिलीवरी हो रही है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत के पास 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार है। भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो कुल मिलाकर 74 दिनों के भंडारण के बराबर है।

इंडियन ऑयल ने भी बताया कि देशभर में प्रतिदिन लगभग 28 लाख एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।


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