अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता, तो मंगलवार से उसके पावर प्लांट और पुलों पर हमले होंगे. ट्रंप ने इस दिन को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे नाम दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने रास्ता नहीं खोला, तो उसे नरक जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने बहुत कड़ी भाषा में कहा कि स्ट्रेट खोलो, नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो. ट्रंप ने पोस्ट में गालियों का भी इस्तेमाल किया.

होर्मुज खोलने के लिए ट्रंप की 10 दिन की डेडलाइन सोमवार को खत्म होने वाली है, जबकि बातचीत बेनतीजा रही है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अगर ईरान कोई समझौता नहीं करता, तो उसके बिजली, पानी और तेल से जुड़े बड़े ढांचों पर हमला किया जाएगा. अमेरिका और इजराइल ने 3 दिन पहले ईरान के करज शहर में B1 ब्रिज पर दो बार हमला किया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और 136 मीटर ऊंचा पुल पूरी तरह तबाह हो गया. करीब 1050 मीटर लंबा यह पुल लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब ₹3,800 करोड़) की लागत से बना था. यह ईरान का सबसे बड़ा पुल था.
ईरान ने ट्रंप की धमकी खारिज कीUS President Donald Trump posts on Truth Social, “…It is time for Iran to make a deal before it is too late and there is nothing left of what still could become a great country…” pic.twitter.com/CrmxmVluPU
— ANI (@ANI)
इधर, ईरान ने इन धमकियों को खारिज किया है और कहा है कि ऐसे हमले करना युद्ध अपराध होगा. तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वह इजराइल और खाड़ी देशों के अहम ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा. हाल के दिनों में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. ट्रंप ने पहले एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें ईरान का एक बड़ा पुल गिरते हुए दिखाया गया. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने बात नहीं मानी, तो पुल और पावर प्लांट अगला निशाना होंगे.
सीजफायर की कोशिशें फेल हुईंपिछले 10 दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई है. यह बातचीत सीधे नहीं हुई, बल्कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के जरिए कराई गई. इसका मकसद युद्ध को रोकना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना था, लेकिन अभी तक कोई खास नतीजा नहीं निकला है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है. यहां से दुनिया के करीब 20 से 30 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है.
यह भी पढ़ें: US या ईरान…किसने तबाह किया C-130 विमान, किसके दावे में कितनी सच्चाई?