हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पहले ही तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अब सऊदी अरब ने एक बड़ा कदम उठाया है, जो भारत के लिए चिंता का कारण बन सकता है। सऊदी अरब की प्रमुख कंपनी अरामको ने मई महीने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में ‘सरचार्ज’ या अतिरिक्त शुल्क को 10 गुना तक बढ़ा दिया है। एशियाई देशों, जैसे भारत को 8 गुना अधिक प्रीमियम चुकाना होगा, जबकि यूरोपीय देशों को 10 गुना अधिक भुगतान करना होगा।
इसका क्या अर्थ है?
कच्चे तेल की कीमत दो घटकों से बनती है: एक रेफरेंस रेट, जैसे ब्रेंट क्रूड या दुबई-ओमान की औसत कीमत, और दूसरा ‘प्रीमियम’। यह प्रीमियम तेल उत्पादक देश अपनी लागत और मांग के अनुसार जोड़ते हैं। बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के अनुसार, अरामको ने भविष्य की डील के लिए नया प्रीमियम रेट जारी किया है।
अप्रैल में, भारत जैसे एशियाई देशों के लिए सऊदी लाइट क्रूड पर अतिरिक्त शुल्क 2.5 डॉलर प्रति बैरल था, जिसे अब मई के लिए बढ़ाकर 19.5 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। यह सीधे 8 गुना की वृद्धि है।
यूरोपीय देशों के लिए, पहले यह रेट 2.65 डॉलर प्रति बैरल था, जिसे बढ़ाकर 27.65 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि यूरोपीय देशों को तेल खरीदने के लिए 10 गुना अधिक प्रीमियम देना होगा।
सऊदी अरब ऐसा कदम क्यों उठा रहा है?
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो चुका है। इराक, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देश अपने तेल का निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन सऊदी अरब के पास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन है, जिससे वह खाड़ी के बजाय लाल सागर के रास्ते अपने तेल का निर्यात कर रहा है। आपूर्ति कम है और मांग अधिक है, जिससे सऊदी अरब ने मुनाफा कमाने का अवसर देखा है।
भारत सऊदी अरब से कितना तेल मंगाता है?
सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 15% से 18% हिस्सा सऊदी अरब से प्राप्त करता है। भारत प्रतिदिन सऊदी अरब से लगभग 10 लाख से 11 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता है.