मध्य पूर्व संकट : जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए जोखिम, विस्थापितों के लिए चुनौतियां
Webdunia Hindi April 07, 2026 09:43 PM

मध्य पूर्व में हिंसक टकराव, हवाई बमबारी व जवाबी हमलों के बीच मानवीय सहायता आवश्यकताएं बढ़ती जा रही हैं, स्वास्थ्य देखभाल समेत बुनियादी सेवाओं पर भीषण दबाव है और जल की सुचारू आपूर्ति पर जोखिम मंडरा रहा है। पश्चिम एशिया के लिए यूएन सामाजिक एंव आर्थिक आयोग (UNESCWA) ने युद्ध प्रभावित देशों में जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए बढ़ रहे ख़तरों और लाखों-करोड़ों लोगों के लिए इसकी सप्लाई प्रभावित होने की आशंका पर चिन्ता व्यक्त की है।

यूएन आयोग ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों (कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, क़तर) में जल की उपलब्धता बहुत कम है और वे मुख्य तौर पर विलवणीकरण (desalination) पर निर्भर हैं यानी खारे पानी से नमक व खनिज हटाकर उसे पीने योग्य बनाना। इस क्षेत्र में लगभग 4 करोड़ लोगों को पेयजल इसी तरह से मुहैया कराया जाता है।

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मगर ड्रोन व मिसाइल हमलों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को क्षति पहुंचने, जल शोधन संयंत्रों पर सीधे हमले होने या उनके समुद्री जल से दूषित होने से सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति पर गहरा असर हो सकता है। विलवणीकरण प्लांट के संचालन के लिए, ऊर्जा प्रणाली की भी अहम भूमिका है, और इसलिए बिजली आपूर्ति में या किसी अन्य प्रकार के ऊर्जा व्यवधान से उन पर गम्भीर असर हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसी मिसाइल का मलबा गिरने, पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाने वाली ऐसी अन्य घटना या अहम बुनियादी ढांचे के नज़दीक हमलों से जलशोधन संयंत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। इन केन्द्रों के लिए अन्य प्रकार के अप्रत्यक्ष ख़तरे भी बड़े हैं। तेल के बिखरने, उसके बड़े दायरे में समुद्री जल में फैलने या रेडियोधर्मी विकिरण से विलवणीकरण के लिए समुद्री जल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

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लेबनान : विस्थापितों की बढ़ती संख्या

लेबनान के बेरूत के बशूरा पड़ोस में हवाई हमलों के बाद मलबे और मलबे के बीच एक क्षतिग्रस्त बच्चे का क्षतिग्रस्त ट्राइसाइकिल पड़ा हुआ है। दृश्य संघर्ष के कारण हुए विनाश और विस्थापन को दर्शाता है। लेबनान में हिज़बुल्लाह द्वारा इसराइल पर रॉकेट हमलों और उसके बाद शुरू हुई इसराइली सैन्य कार्रवाई में अब तक 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। 1.37 लाख लोगों ने लगभग 700 सामूहिक केन्द्रों पर शरण ली हुई है, जिनमें एक-तिहाई संख्या बच्चों की है।

अनेक अन्य मेज़बान समुदायों या अनौपचारिक रूप से रह रहे हैं और उनके पास बुनियादी सेवाओं की सीमित सुलभता है। एक अनुमान के अनुसार, लेबनान में 85 प्रतिशत से अधिक विस्थापित महिलाएं व लड़कियां, औपचारिक आश्रय केन्द्रों के बाहर रह रही हैं, जहां बहुत भीड़भाड़ है और उनकी सलामती पर जोखिम है।

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संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्द आबादी तक तत्काल राहत पहुंचाने में जुटी हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने जल आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 2.8 लाख लीटर ईंधन मुहैया कराया है। लड़ाई भड़कने के बाद से अब तक 30 लाख से अधिक आहार व 65 हज़ार खाद्य पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

मगर सहायता सेवाओं तक पहुंच न हो पाने और असुरक्षा की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को मदद नहीं मिल पा रही है, विशेष रूप से अनौपचारिक शरण केन्द्रों में रहने वाले लोगों को। यूएन मानवीय सहायता संगठनों ने युद्धरत पक्षों से हिंसक टकराव व तनाव में कमी लाने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राहत प्रयासों के लिए मार्ग मुहैया कराए जाने की अपील की है, हालांकि वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत भी एक बड़ी चुनौती है।

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सुरक्षा की तलाश में बेघर

हाल ही में लौटे अफगान लोग इस्लाम काला सीमा पार पर पंजीकरण क्षेत्र से गुजर रहे हैं, एक व्हीलबरो पर अपने सामान ले जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व में व्याप्त संकट की वजह से अनेक देशों में आबादी अपने घरों से दूर जाने के लिए मजबूर हो रही है।

फ़रवरी के अन्तिम दिनों से 2 अप्रैल के दौरान 68 हज़ार ईरानी नागरिकों ने सीमा पार करके तुर्कीये में प्रवेश किया है, जबकि 53 हज़ार वापस लौट आए हैं। यूएन एजेंसी ने बताया कि सामूहिक विस्थापन के बजाय यह स्थिति ऐहतियात के लिए की गई यात्रा को दर्शाती है। ईरान में फ़िलहाल 32 लाख नागरिक अस्थाई रूप से विस्थापित होने की आशंका है।

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सीमा पार आवाजाही भी बड़े पैमाने पर हो रही है और लेबनान में लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक, 1.9 लाख सीरियाई नागरिक और 31 हज़ार से अधिक लेबनानी सीमा पार करके सीरिया में प्रवेश कर चुके हैं। वहीं ईरान और पाकिस्तान में शरण लेकर रह रहे 57 हज़ार से अधिक अफ़ग़ान नागरिकों ने अपने देश वापसी की है, हालांकि अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता और सीमावर्ती इलाक़ों में तनाव की वजह से हालात कठिन हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों पर हमलों की निंदा

इस बीच लेबनान में रफ़ीक हरीरी अस्पताल में रविवार को हुए एक हमले में कम से कम 4 लोगों के मारे जाने और 39 के घायल होने का समाचार है। इस घटना में अस्पताल को क्षति पहुंचने की जानकारी नहीं है, मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों के नज़दीक लड़ाई और हमलों के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त की है।

यूएन एजेंसी ने बताया कि 28 से 31 मार्च के दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों पर 11 हमलों की जानकारी मिली है यानी औसतन प्रतिदिन 2 हमले, जिससे दक्षिणी लेबनान और बेरूत में सेवाओं पर असर हुआ है। 28 फ़रवरी को मध्य पूर्व में हिंसक टकराव भड़कने के बाद से अब तक स्वास्थ्य केन्द्रों, मेडिकल परिवहन, कर्मचारियों, भंडारण केन्द्रों पर 92 हमले होने की पुष्टि की गई है। इनमें 53 लोगों की जान गई है और 137 घायल हुए हैं।

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यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने ज़ोर देकर कहा कि ये कृत्य नई सामान्य स्थिति नहीं बनने दी जा सकती है। स्वास्थ्य देखभाल का संरक्षण वैकल्पिक नहीं है, बल्कि एक सार्वभौम दायित्व है। उन्होंने इसराइल द्वारा अपने सैन्य अभियान का विस्तार किए जाने के बीच, सभी युद्धरत पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन करने, स्वास्थ्य केन्द्रों स्वास्थ्यकर्मियों और मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

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