ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र Kharg Island पर एक बार फिर कई हमलों की खबरें सामने आई हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) को लेकर बातचीत लगभग ठप पड़ चुकी है और तनाव चरम पर पहुंच गया है। खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जहां से देश के करीब 90% तेल निर्यात होता है। ईरान ने अपने पड़ोसियों को भी चेतावनी दी है। ईरान के काशान में रेलवे ब्रिज पर हुए हमले में 2 लोगों की मृत्यु हो गई, IRNA ने प्रांतीय अधिकारी के हवाले से बताया।
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हाल के हमलों में इस रणनीतिक द्वीप को निशाना बनाया गया। इससे दुनिया के ऊर्जा बाजार को टेंशन में डाल दिया है। खार्ग आइलैंड पर हमले और ठप पड़ी वार्ताओं ने साफ कर दिया है कि ईरान युद्ध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की तरफ धकेल सकता है।
खार्ग द्वीप पर हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि 'अब संयम खत्म हो चुका है।' Metro.uk की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बयान से क्षेत्र में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंकाएं और गहरा गई हैं।
यह अमेरिकी हमले ऐसे समय में हुए हैं जब ईरान ने वॉशिंगटन के एक और युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष अब छठे हफ्ते में पहुंच चुका है। IRGC ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़ी बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है, जिससे क्षेत्र में तेल और गैस की आपूर्ति 'कई वर्षों तक' प्रभावित हो सकती है।
यह चेतावनी उस बयान के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा था कि वह यह विचार कर रहे हैं कि क्या अमेरिकी सेना खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। ईरान के तट से करीब 16 मील दूर और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से लगभग 300 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित इस द्वीप को इसकी कड़ी सुरक्षा और अलग-थलग स्थिति के कारण अक्सर 'फॉरबिडन आइलैंड' भी कहा जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप की बड़े हमले की चेतावनीइससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले नहीं रुके तो खार्ग द्वीप के तेल ढांचे पर हमले किए जाएंगे। रविवार को उन्होंने ईरान पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान को जल्द से जल्द होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना चाहिए और इसके लिए 48 घंटे की समयसीमा भी तय की। IRGC ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरानी परिसंपत्तियों को निशाना बनाया गया तो मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगियों के ऊर्जा ढांचे को “राख में बदल दिया जाएगा।
अमेरिका इस इलाके पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर चुका है। इसमें कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका ने संकेत दिया था कि अगर बातचीत सफल नहीं होती तो ईरान के ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावित अस्थायी युद्धविराम को सिरे से खारिज कर दिया है और स्थायी शांति समझौते की मांग रखी है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते से पहले अमेरिकी हमले पूरी तरह बंद हों, प्रतिबंध हटाए जाएं और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने शर्तें नहीं मानीं, तो और बड़े हमले किए जा सकते हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि अगर उसके ऊर्जा या नागरिक ढांचे को निशाना बनाया गया, तो वह 'भारी और व्यापक' जवाब देगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। Edited by : Sudhir Sharma