चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद
Tarunmitra April 08, 2026 11:43 PM

अशोकनगर । मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज
सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित
मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।

जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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