Bengaluru, 8 अप्रैल . कर्नाटक Government ने Wednesday को स्पष्ट किया कि राज्य में ऑटो एलपीजी की कोई कमी नहीं है. Government ने ऑटो मालिकों और चालकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अफवाहों पर विश्वास न करें, क्योंकि आपूर्ति पूरी तरह से पर्याप्त है.
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक बयान जारी कर बताया कि राज्य के कई ऑटो चालकों ने गैस की अनियमित उपलब्धता के कारण परेशानी जताई है. कई चालकों को गैस स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है. इस स्थिति ने उनके बीच चिंता भी बढ़ा दी है और कमी की अफवाहें फैल रही हैं.
Government ने कहा कि कुछ निजी ऑटो गैस आपूर्ति एजेंसियों में सप्लाई में उतार-चढ़ाव जरूर देखा गया है, लेकिन वास्तविक रूप से एलपीजी की कोई कमी नहीं है. इंडियन ऑयल, India पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां लगातार आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच ऑटो एलपीजी की आपूर्ति 83 से 94 मीट्रिक टन प्रतिदिन के बीच रही. 5 अप्रैल को सबसे अधिक 94.11 मीट्रिक टन आपूर्ति दर्ज की गई.
Government ने बताया कि औसतन प्रतिदिन 83.58 मीट्रिक टन गैस की आपूर्ति की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे. साथ ही चालकों से गैस पंपों पर अनावश्यक कतारें न लगाने की भी अपील की गई है.
वहीं, केंद्र Government ने औद्योगिक क्षेत्र के लिए एलपीजी आवंटन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर नई व्यवस्था की जानकारी दी है.
नई गाइडलाइन के अनुसार, कुल एलपीजी आवंटन का 70 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया जाएगा. इसके अलावा, जिन राज्यों ने पीएनजी सुधार लागू किए हैं, उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन मिलेगा. फार्मास्युटिकल, खाद्य और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही उन इकाइयों को भी प्राथमिकता मिलेगी जो प्राकृतिक गैस पर स्विच नहीं कर सकतीं.
गाइडलाइन में बड़े उपभोक्ताओं के लिए 0.2 टीएमटी प्रतिदिन की सीमा तय की गई है और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स के लिए पीएनजी पंजीकरण अनिवार्य किया गया है.
नई व्यवस्था से पैकेजिंग, पेंट, स्टील और सिरेमिक जैसे उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. उद्योगों के लिए ईंधन कोटा मार्च 2026 के उपभोग के आंकड़ों के आधार पर तय किया जाएगा.
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डीएससी