Supreme Court में पीआईएल : बंगाल में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग
Indias News Hindi April 09, 2026 09:43 PM

New Delhi, 9 अप्रैल . Supreme Court में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है. इस पीआईएल में चुनाव वाले राज्य पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर Political मकसद से की जा रही हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं से न्यायिक अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई है.

अखिल India हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर इस याचिका में, संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत Supreme Court के अधिकार क्षेत्र का हवाला दिया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ सालों से राज्य में चुनावी हिंसा और सरकारी अधिकारियों के काम में रुकावट डालने का एक सिलसिला चल रहा है.

इस याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह ‘सभी जरूरी कदम’ उठाए, जिसमें अधिकारियों और आम जनता की सुरक्षा के लिए पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी शामिल है, ताकि पश्चिम बंगाल में चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सकें. इसके साथ ही, राज्य Government को भी निर्देश देने की मांग की गई है कि वह चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद के समय में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखे.

पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए, याचिका में 2013 के ग्रामीण चुनावों के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्टों का हवाला दिया गया है. इन चुनावों में कथित तौर पर 39 लोगों की जान चली गई थी, और बड़ी संख्या में सीटों पर बिना किसी मुकाबले के ही जीत हासिल कर ली गई थी, जिसके पीछे कथित तौर पर डराने-धमकाने की रणनीति काम कर रही थी.

याचिकाकर्ता ने 2018 के पंचायत चुनावों का भी जिक्र किया है, जिसमें दावा किया गया है कि लगभग 20 लोगों की हत्या कर दी गई थी, और विपक्षी उम्मीदवारों को धमकियों और ज़ोर-जबरदस्ती के चलते अपना नामांकन दाखिल करने से रोक दिया गया था. याचिका में कहा गया है, “पश्चिम बंगाल में बार-बार होने वाली Political हिंसा की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही है.”

याचिका में हाल की कुछ घटनाओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. इनमें इस साल जनवरी में कोलकाता और दिल्ली में की गई तलाशी के दौरान Enforcement Directorate (ईडी) के अधिकारियों के काम में कथित तौर पर रुकावट डालने की घटनाएं शामिल हैं. इसके अलावा, नदिया और हुगली जैसे जिलों में चुनाव अधिकारियों और सरकारी अफसरों को धमकियां दिए जाने की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है.

याचिका में अप्रैल 2026 में चलाए गए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) अभियान के दौरान हुई एक घटना का भी हवाला दिया गया है. इस घटना में कथित तौर पर सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक एक भीड़ ने घेर रखा था, और Police तथा केंद्रीय बलों ने काफी देर तक रुकावट बने रहने के बाद ही हस्तक्षेप किया था.

याचिका में कहा गया है, “इस स्थिति ने डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे अधिकारी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं.”

हुगली जिले में हुई एक और घटना का भी जिक्र किया गया है, जहां चुनाव संबंधी नियमों के पालन की निगरानी कर रहे सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर धमकियां दी गई थीं, जिसके चलते वहां केंद्रीय बलों की तैनाती करनी पड़ी थी.

इस स्थिति को ‘गंभीर और चिंताजनक’ बताते हुए, याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी कर्मचारियों की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी कमजोर करती हैं. याचिका में कहा गया है, “न्यायिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा न कर पाना, कानून के शासन की बुनियाद पर ही चोट करता है.”

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि राज्य की मशीनरी ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने में नाकाम रही है, जिसके चलते केंद्र Government और Supreme Court के दखल की जरूरत है.

इसमें आगे कहा गया है, “डर, जोर-जबरदस्ती और हिंसा के माहौल में चुनाव कराना, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक आदेश के बिल्कुल खिलाफ है.”

मांगी गई राहतों में, याचिका में Supreme Court से गुजारिश की गई है कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें, Political लोगों के दखल को रोकें, और नागरिकों व अधिकारियों की सुरक्षा के लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाएं.

एससीएच

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