ऑफिस में काम का बोझ इतना ज्यादा होता है कि कई बार कर्मचारी चाहकर भी अपनी पूरी छुट्टियां नहीं ले पाते। साल खत्म होते ही ये छुट्टियां अक्सर ‘लैप्स’ यानी बेकार हो जाती थीं, जिससे कर्मचारियों को काफी दुख होता था। लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है! केंद्र सरकार के नए लेबर नियमों (Labor Laws) ने कर्मचारियों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। अब आपकी मेहनत की कमाई हुई एक भी छुट्टी जाया नहीं होगी, बल्कि उसके बदले आपको सीधे नकद पैसे मिलेंगे।
छुट्टियां बचीं तो कंपनी को ढीली करनी होगी जेबनए श्रम प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी साल भर में अपनी ‘अर्न्ड लीव’ (Earned Leaves) का इस्तेमाल नहीं कर पाता है, तो कंपनी को उन बची हुई छुट्टियों का पैसा कर्मचारी को देना होगा। यह नियम उन लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो काम की व्यस्तता के चलते ब्रेक नहीं ले पाते थे। अब आपकी बची हुई छुट्टियां आपकी एक्स्ट्रा इनकम का जरिया बनेंगी।
30 दिन से ज्यादा छुट्टी हुई तो तुरंत मिलेगा कैशनियमों में यह भी साफ किया गया है कि एक कर्मचारी अपने अगले साल के खाते में अधिकतम 30 दिन की छुट्टियां ही ट्रांसफर या ‘कैरी फॉरवर्ड’ कर सकता है। अगर आपकी बची हुई छुट्टियां 30 दिन से ज्यादा हो रही हैं, तो कंपनी को उन अतिरिक्त दिनों का भुगतान उसी चालू वर्ष के अंत में करना अनिवार्य होगा। यानी अब छुट्टियों का हिसाब-किताब बिल्कुल क्लियर रहेगा।
छुट्टियों के लिए अब नहीं करना होगा लंबा इंतजारपहले के नियमों के अनुसार, छुट्टियों का हक पाने के लिए कर्मचारी को साल में कम से कम 240 दिन काम करना जरूरी होता था। सरकार ने अब इस सीमा को घटाकर सिर्फ 180 दिन कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब कर्मचारी बहुत ही कम समय में छुट्टियां कमाने और उनका फायदा उठाने के पात्र बन जाएंगे। नए जॉइन करने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ी राहत है।
नौकरी छोड़ने पर 48 घंटे में होगा फुल सेटलमेंटअक्सर देखा जाता है कि नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारियों को अपने बकाया पैसों के लिए हफ्तों या महीनों चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन नए नियमों ने कंपनियों पर नकेल कस दी है। अब अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या उसे नौकरी से हटाया जाता है, तो कंपनी को उसका पूरा हिसाब-किताब और छुट्टियों का पैसा महज 48 घंटे के भीतर चुकाना होगा।
छुट्टी रिजेक्ट हुई तो भी होगा आपका फायदाकई बार कर्मचारी छुट्टी मांगता है लेकिन कंपनी काम का हवाला देकर उसे नामंजूर कर देती है। नए प्रावधानों के तहत, अगर कंपनी ने आपकी छुट्टी की अर्जी खारिज की है, तो वे छुट्टियां आपकी 30 दिन की लिमिट में नहीं गिनी जाएंगी। वे पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी और उनके बदले आपको भुगतान मिलेगा। इन बदलावों से कर्मचारियों को दोहरा फायदा होने वाला है—एक तरफ मानसिक शांति और दूसरी तरफ आर्थिक लाभ।