पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर नई विवादित स्थिति सामने आई है। अभी अमेरिका ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान कुछ जहाजों से इस अहम समुद्री मार्ग को पार करने के लिए करीब 20 लाख डॉलर तक की वसूली कर रहा है। तो क्या भारत भी यह टोल चुकाएगा और आगे Strait of Hormuz को लेकर ईरान का क्या प्लान है।
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Strait of Hormuz ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो पर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद यह मार्ग वैश्विक शिपिंग के लिए और भी संवेदनशील हो गया है।
भारत ने साफ किया है कि उसने हमेशा इस जलमार्ग में 'मुक्त और सुरक्षित आवाजाही' की वकालत की है और टोल को लेकर ईरान से कोई चर्चा नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कम से कम 8 भारतीय LPG टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं और ईरान ने भारत को 'मित्र देश' मानते हुए रास्ता दिया है।
टोल को लेकर कोई बातचीत नहींभारत ने इस पूरे विवाद पर संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि भारत और ईरान के बीच टोल को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। भारत ने दोहराया कि वह हॉर्मुज में फ्री और सेफ नेविगेशन का समर्थन करता है। हालांकि सरकार ने ईंधन उपयोग को सीमित करना शुरू कर दिया है और ग्रे मार्केट में कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है- करीब 90% तेल-गैस आयात करता है, जिसमें से अधिकांश Strait of Hormuz के जरिए आता है।
युद्धविराम के बाद भी नहीं खुला रास्ता, क्या है ईरान का प्लानहालांकि हाल ही में युद्धविराम हुआ है, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। जहाज मालिक अभी भी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं और ट्रैफिक पहले के मुकाबले काफी कम है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना एक अहम मुद्दा रहा। ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव में इस जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की बात शामिल है, जिसके तहत व्यापारी जहाजों पर भारी टोल लगाया जा सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बयान देकर भ्रम और बढ़ा दिया।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को 'जॉइंट वेंचर' के रूप में भी देखा जा सकता है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अगले दो हफ्तों तक सीमित और समन्वित तरीके से जहाजों की आवाजाही संभव होगी। यूरोपीय संघ ने भी स्पष्ट किया है कि इस मार्ग पर बिना किसी शुल्क के स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि युद्धविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। इज़राइल और लेबनान के बीच संघर्ष जारी है, जहां Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। Edited by : Sudhir Sharma