पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर खत्म हो चुका है. इस दौरान ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अराघची और अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया. दोनों देशों के बीच आमने-सामने चर्चा के दौरान होर्मुज को लेकर वेंस-अराघची के बीच बहस हो गई, जिससे द्विपक्षीय वार्ता में माहौल गरमा गया. वहीं दूसरी ओर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जंग जारी रखने का ऐलान करके शांति वार्ता पर सवाल खड़ा कर दिया है.
नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा कि मेरे नेतृत्व में, इजराइल ईरान के आतंकवादी शासन और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा. इसके विपरीत तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन उन्हें सहायता प्रदान करते हैं और यहां तक कि अपने कुर्द नागरिकों का नरसंहार भी करते हैं.

नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ लड़ाई में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करने का दावा करते हुए शनिवार को एक वीडियो संदेश भी जारी किया. उन्होंने कहा कि अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और इजराइल ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर दिया है. नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में जारी वीडियो में कहा, ईरान के खिलाफ अभियान खत्म नहीं हुआ है, हमें अभी और काम करना है. लेकिन अब भी यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि हमने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं.
ईरान से हटाया जाएगा यूरेनियमउन्होंने कहा कि हमने यह अभियान इसलिए शुरू किया, क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब था और प्रतिदिन सैकड़ों मिसाइलें बनाने की क्षमता रखता था. ये दो बड़े खतरे थे, जिन्हें हमें अपने सिर से हटाना था.उन्होंने दावा किया, खामेनेई मिसाइल उत्पादन और परमाणु कार्यक्रम को जमीन के बहुत अंदर इस तरह छिपाना चाहता था ताकि बी-2 विमान भी वहां तक न पहुंच पाएं. हम चुपचाप खड़े नहीं रह सकते थे. उन्होंने कहा कि ईरान में अब भी 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है.उन्होंने कहा कि इसे या तो कूटनीतिक प्रक्रिया के जरिए या बल प्रयोग के माध्यम से ईरान से हटाया जाएगा.
अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक बातचीतउपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को पाकिस्तान में शीर्ष ईरानी वार्ताकारों के साथ ऐतिहासिक आमने-सामने की बातचीत की. इसका मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक शांति समझौते पर पहुंचना था, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को पंगु बना दिया है और व्यापार को बाधित किया है.
पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई ये बातचीत 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली सीधी, उच्च स्तरीय बातचीत वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है और इससे एक महत्वपूर्ण सफलता की उम्मीदें बढ़ रही हैं.
शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकेंइस्लामाबाद के सेरेना होटल में बाततीच से पहले, वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी दल और संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकें कीं. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ के दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग बैठकें करने के बाद, ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत हुई.
बातचीत जारी रहने के दौरान, ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विशेषज्ञ स्तर पर पहुंच गई है, क्योंकि आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु समितियां भी इसमें शामिल हो गई हैं. विस्तार से बताए बिना, सरकार ने कहा कि कुछ तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप के दामाद भी बातचीत में शामिलवेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी हैं, जबकि गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल थे.
लेबनान पर इजराइल का भीषण हमलाईरान और अमेरिका द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद, दोनों पक्ष शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे. हालांकि, लेबनान पर इजराइल के भीषण हमलों में 300 से अधिक लोगों की मौत ने युद्धविराम को चकनाचूर कर दिया है. तेहरान ने दावा किया कि हमले ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, जबकि अमेरिका और इजराइल ने कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था.
इससे पहले, नूर खान एयरपोर्ट पर दोनों प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत उप प्रधानमंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी ने किया. ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी मुलाकात में, प्रधानमंत्री शरीफ ने शांति वार्ता से सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहने के पाकिस्तान के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की.
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापितअमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, शरीफ ने उम्मीद जताया किया कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी. इसी संदर्भ में, ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि यदि अमेरिकी पक्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के अनुरूप अमेरिका के हित में काम करे, तो शांति वार्ता से समझौता हो सकता है. हालांकि, अगर हमें इजराइल फर्स्ट के प्रतिनिधियों का सामना करना पड़ा, तो कोई समझौता नहीं होगा. आरिफ ने चेतावनी दी कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो दुनिया को और भी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
धोखा देने की कोशिशबातचीत से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है. वहीं शनिवार तड़के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद, गालिबफ ने पत्रकारों से अमेरिका के साथ भरोसे के मुद्दे पर बात की और ईरान के अमेरिका के साथ बीते अनुभवों की याद दिलाई.
उन्होंने कहा कि एक साल से भी कम समय में दो बार, बातचीत के बीच में, और ईरानी पक्ष की सद्भावना के बावजूद, उन्होंने हम पर हमला किया. उन्होंने आगे कहा, हमारी सद्भावना तो है, लेकिन हमें (अमेरिकियों पर) भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष वास्तविक समझौते के लिए तैयार है, तो उसे तेहरान की तत्परता भी दिख जाएगी.