इस्लामाबाद वार्ता तो बस दिखावा, ईरान को लेकर ट्रंप की प्लानिंग कुछ और, इस मिशन में जुटे अमेरिका और इजराइल
TV9 Bharatvarsh April 12, 2026 11:42 AM

दुनिया की निगाहें सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका की शांतिवार्ता पर टिकी रहीं. पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित की जानी वाली इस शांतिवार्ता का क्या सचमुच कोई बेहतर नतीजा निकल सका? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फेल रही. वहीं अमेरिका से आ रही रिपोर्ट्स में दावा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे चरण की जंग की तैयारियां तेज कर दी हैं. इस चरण में ट्रंप के टारगेट पर ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज हैं, जिन्हें तबाह करने के लिए खास प्लान तैयार किया गया है. लेकिन सवाल है कि अचानक ट्रंप ने शांतिवार्ता के बीच ये फैसला क्यों लिया? इसके बारे में जानते हैं.

माना जा रहा है डोनाल्ड ट्रंप इस्लामाबाद वार्ता के जरिए 1 तीर से दो निशाने लगाना चाहते थे. पहला ये कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी जनता को भरोसा दिलाना चाहते थे कि वो शांति के पक्षधर हैं. इसकी वजह है अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव, जो इसी साल नवंबर में होने हैं.युद्ध और महंगाई की वजह से ट्रंप के ऊपर जबरदस्त दबाव है. MAGA समर्थकों में उनकी लोकप्रियता घटती जा रही है. ऐसे में वो वार्ता की मेज पर आकर ये दिखाना चाहते हैं कि वो शांति के पक्षधर हैं. ताकि मध्यावधि चुनावों में MAGA समर्थकों को बिखरने से रोका जा सके.

‘परमाणु हथियार नहीं होने की ट्रंप की शर्त’

दूसरा ये कि वार्ता के जरिए डोनाल्ड ट्रंप युद्ध के दूसरे चरण के लिए वक्त चाहते हैं, जिसमें वो ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं.ताकि, सभी लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और MAGA समर्थकों के सामने खुद को एक विजेता की तरह पेश कर सकें. एक रिपोर्टर ने जब डोनाल्ड ट्रंप से शांति वार्ता को लेकर सवाल पूछा कि आपके लिए एक अच्छी डील कैसी होगी? तो ट्रंप ने जवाब दिया कि सबसे पहली शर्त है परमाणु हथियार नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मुझे लगता है सत्ता परिवर्तन हो चुका है. लेकिन हमने इसे कभी मानदंड नहीं बनाया.

परमाणु हथियार नहीं होना इसका 99% हिस्सा है. रिपोर्टर ने जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सवाल पूछा तो ट्रंप ने कहा कि हां वो अपने आप खुल जाएगा. अगर हम बस वहां से चले गए, तो स्ट्रेट उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा. इसलिए स्ट्रेट खुल जाएगा. लेकिन हमारी शर्त यह है कि कोई परमाणु हथियार न हो, फिर भी हम स्ट्रेट को खोल देंगे.

ट्रंप ने कहा कि यह मत भूलिए कि हम स्ट्रेट का इस्तेमाल नहीं करते. दूसरे देश इसका इस्तेमाल करते हैं. इसलिए दूसरे देश हमारे पास आ रहे हैं और वे मदद करेंगे. लेकिन हम इसका इस्तेमाल नहीं करते. यह आसान नहीं होगा. मैं बस इतना कहूंगा, हम इसे बहुत जल्द खुलवा लेंगे.

ऐसे में रिपोर्ट्स की मानें तो इस पूरी कवायद के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा षड्यंत्र है, जिसके केंद्र में ईरानी यूरेनियम को जब्त करने और उसके बैलिस्टिक प्रोग्राम को खत्म करने की रणनीति शामिल है.

ईरान का पूरा सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर पहाड़ों के नीचे

दरअसल 40 दिन के युद्ध के बाद ट्रंप और उनके कमांडर समझ चुके हैं कि सिर्फ एयरस्ट्राइक के दम पर वो ईरान में कुछ भी हासिल नहीं कर सकते. ईरान का पूरा सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर पहाड़ों की नीचे बनी सुरंगों में मौजूद हैं. यहां ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और असेंबली लाइनें हैं. जिसे अमेरिका का कोई बम तबाह नहीं कर सकता. ऐसे में अब ट्रंप के सामने ग्राउंड ऑपरेशन ही आखिरी विकल्प है. लेकिन ईरान की पहाड़ों के सैकड़ों फीट नीचे बनी सुरंगों में उतरना खुदकुशी करने जैसा होगा और इसकी वजह है कि इन भूल भूलैया जैसी सुरंगों में बिछाया गया जाल, जिसे भेद पाना अमेरिकी सैनिकों के लिए बेहद मुश्किल है.

मिसाइल सिटी में तैनात ईरानी सैनिक

जाग्रोस पर्वत के नीचे ईरान की कई बैलिस्टिक मिसाइल सिटी बनी हैं, जिन्हें एयरस्ट्राइक में तबाह करना बेहद मुश्किल है. वार्ता में कोई हल नहीं निकला है. ऐसे में अमेरिका के यहां ग्राउंड ऑपरेशन चला सकता है, लेकिन ये ऑपरेशन बेहद ज्यादा मु्श्किल होने वाला है. दरअसल, ये मिसाइल सिटी किसी भूल भुलैया से कम नहीं हैं. यहां कई एंट्री और एग्जिट गेट हैं. साथ ही इसकी ईरान सेना ने जबरदस्त किलेबंदी की है.

मिसाइल सिटी के चप्पे-चप्पे पर बड़ी संख्या में ईरानी सैनिकों की तैनाती रहती है. उनकी नजर से बचकर अंदर घुस पाना बेहद मुश्किल है.. मिसाइल सिटी के कई हिस्सों में माइन और ट्रिप-वायर लगाए गए हैं. इन हिस्सों को सिर्फ घुसपैठियों को उलझाने के लिए बनाया गया है. ताकि वो गलत रास्ते पर आगे बढ़ें तो जल्द ही मारे जाएं. इसके अवाला सुरंगों में जगह-जगह पर वेंटिलेशन बंद करने के उपकरण लगाए गए हैं, जो जहरीली गैसों से भरे हैं. टनल के किसी भी हिस्से में घुसपैठ होती है तो इस हिस्से में वेंटिलेशन बंद कर जहरीली गैसें छोड़ दी जाएंगी और सभी घुसपैठिए मारे जाएंगे. इन सभी बाधाओं को पार करने के बाद ही टनल के उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. जहां बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा हिस्सा मौजूद है.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी 9 भारतवर्ष

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