कर्नाटक में मंत्री पद के लिए घमासान, हाईकमान से मिलने दिल्ली आ रहे 30 विधायक, राहुल-खरगे से मांगा समय
TV9 Bharatvarsh April 13, 2026 02:42 AM

कर्नाटक कांग्रेस में सियासत फिर तेज हो गई है. सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग को लेकर कांग्रेस के करीब 30 विधायक दिल्ली आ रहे हैं. इन विधायकों का नेतृत्व अशोक पट्टन और टीबी जयचंद्र कर रहे हैं. विधायकों का यह जत्था राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात करेगा और मंत्री पद की मांग करेगा.

विधायकों का कहना है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल जल्द होना चाहिए. सरकार बने तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं हुआ है. उनका कहना है कि अगर अब मंत्रिमंडल के फेरबदल में देरी होती है, तो फिर उन्हें मंत्री पद मिल भी जाता है तो इसका क्या फायदा होगा? विधायक मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं. इसी उद्देश्य से वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों का समूह कर्नाटक से दिल्ली के लिए रवाना हुआ है.

मंत्री पद पद के इच्छुक लगभग 25 से 30 वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों का एक समूह रविवार दोपहर दिल्ली के लिए रवाना हो गया. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात के लिए रवाना होने से पहले ही विधायकों के इस समूह का दिल्ली के लिए रवाना होना, राज्य की राजनीति में काफी उत्सुकता पैदा कर रहा है.

खरगे और राहुल गांधी से मिलने का मांगा समय

दिल्ली आने वाले विधायकों में कई वरिष्ठ विधायक हैं, और वे कम से कम तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और मंत्री पद की उम्मीद कर रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि वे दो से तीन दिन दिल्ली में रूकेंगे और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलकर अपनी बात रखेंगे. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने राहुल गांधी से भी मिलने का समय मांगा है.

सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल फेरबदल के लिए दिल्ली गए अधिकांश विधायक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुट से जुड़े हैं. हालांकि, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुट के विधायकों का दिल्ली जाने से हिचकिचाना सवाल पैदा कर रहा है. नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाने वाले डीके शिवकुमार गुट के विधायकों का अब मंत्रिमंडल फेरबदल की पहल से दूर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है.

दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट उपचुनावों के बाद नेतृत्व परिवर्तन का विवाद अब एक बार फिर सामने आने की संभावना है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार उपचुनावों के समाप्त होने तक चुप रहे, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनका विवाद चुनाव को प्रभावित करे. हालांकि, अब जब डीके शिवकुमार गुट कह रहा है कि मतदान समाप्त होते ही वे नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे, तो सिद्धारमैया ने मंत्रिमंडल फेरबदल के नाम पर अपनी मुख्यमंत्री शक्ति का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है.

मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग पर गरमाई सियासत

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए विधायकों को खुद दी दिल्ली भेजा है. विधायकों के दिल्ली जाने के बारे में मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीएम सिद्धारमैया ने कहा, “दिल्ली जाने में क्या बुराई है, मैं मना करने वाला कौन होता हूं?” उन्होंने कहा कि हमने राज्य में मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा की है. ढाई साल बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल होना ही था. उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव और उपचुनावों के कारण इसमें देरी हुई है. इस तरह सिद्धारमैया ने परोक्ष रूप से विधायकों की दिल्ली यात्रा का समर्थन किया है.

मुख्यमंत्री गुट के अधिकांश विधायक मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए हाईकमान पर दबाव बनाने दिल्ली गए हैं, जबकि डीके शिवकुमार और उनके गुट के विधायक चुप हैं, जो बेहद दिलचस्प है. हालांकि, क्या हाईकमान मंत्रिमंडल में फेरबदल की इस मांग को मान लेगा? या फिर विधायकों के दबाव में आकर मंत्रिमंडल में फेरबदल को हरी झंडी दे देगा? इसे लेकर राजनीतिक कयास तेज है.

इनपुट-टीवी9 कन्नड़

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