महाराष्ट्र के नासिक की शांत फिजाओं में स्थित उस बीपीओ (TCS) की ऊंची इमारत को देखकर कोई भी कह सकता है कि क्या किस्मत है इन युवाओं की, जो यहां काम करते हैं। लेकिन, उन कांच की दीवारों के पीछे जो हो रहा था, उसे सुनकर रूह कांप जाए। वहां 'टारगेट' पूरा करने के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि अस्मत और धर्म की बलि भी मांगी जा रही थी।
दरअसल, दफ्तर की फाइलों के बीच दफन हो रहा था महिला कर्मचारियों का सम्मान। सीनियर्स की हवस का शिकार बनी एक बेबस लड़की ने जब हिम्मत जुटाकर एचआर (HR) का दरवाजा खटखटाया, तो वहां उसे इंसाफ नहीं, बल्कि खामोश रहने की नसहीत मिली। आरोप है कि वहां एक संगठित गिरोह चल रहा था, जो कमजोर लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता था और फिर उन्हें मजहब बदलने के लिए मजबूर करता था।
जब जुल्म की इंतहा हो गई तो एक महिला कर्मचारी ने देवलाली पुलिस थाने में पहुंचकर अपने सीनियर पर रेप का संगीन इल्जाम लगा दिया। यह तो बस शुरुआत थी। देखते ही देखते मुंबई नाका पुलिस थाने में कई शिकायतें दर्ज हो गईं। आठ और एफआईआर दर्ज हुईं। हर कहानी का सार एक ही था- यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और धर्म परिवर्तन का दबाव।
फिर शुरू हुआ पुलिस का ऑपरेशनपुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक समझ चुके थे कि आरोपी बहुत शातिर हैं और सबूत कॉर्पोरेट फाइलों के पीछे छिपे हैं। उन्होंने एक मास्टरप्लान तैयार किया—'ऑपरेशन नासिक बीपीओ'। इस ऑपरेशन के लिए छह जांबाज महिला पुलिसकर्मियों को चुना गया। उनकी पहचान बदली गई, वे मध्यमवर्गीय परिवार की जरूरतमंद लड़कियां बनीं और इंटरव्यू देकर उस कंपनी में नौकरी करने लगीं। इन 'अंडरकवर' पुलिसकर्मियों ने 40 दिनों तक वह सब झेला, जो वहां की आम लड़कियां झेलती थीं। सीनियर का केबिन में बुलाकर अश्लील हरकतें करना और मजहबी चर्चा के बहाने ब्रेनवॉश की कोशिश करना, सब कुछ इन महिला पुलिसकर्मियों की नजर में था।
दिन भर ड्यूटी करने के बाद ये महिला पुलिसकर्मी रात में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पल-पल की रिपोर्ट देती थीं। उन्होंने दफ्तर के ही सीसीटीवी कैमरों को हथियार बनाया और वो फुटेज सुरक्षित कर लिए, जिन्हें रसूखदार आरोपी मिटाने की फिराक में थे। 40 दिन की कोशिशों के बाद पुलिस के पास इतने सबूत इकट्ठे हो चुके थे कि कंपनी के गुनहगारों गाज गिरनी तय थी।
आधी रात को पड़ा छापा, उड़े होश सबूत पुख्ता होते ही एसआईटी (SIT) का गठन हुआ और पुलिस एक्शन में आ गई। फिर एक दिन पुलिस की गाड़ियों ने दफ्तर को घेर लिया। एचआर मैनेजर महिला समेत सात लोगों को दबोच लिया गया। उन पर रेप, छेड़खानी और धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसी धाराएं लगाई गईं। कंपनी ने आनन-फानन में आरोपियों को सस्पेंड कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन सवाल अब भी वही है- क्या इतनी बड़ी कंपनी को अपने ही दफ्तर में चल रहे इस 'पाप' की भनक नहीं थी?
सबसे अहम बाद यह है कि नासिक की उन छह महिला पुलिसकर्मियों की बहादुरी और समझदारी की की चर्चा हर तरफ है, जिन्होंने अपनी पहचान दांव पर लगाकर उन 'भेड़ियों' को बेनकाब किया, जो कॉर्पोरेट सूट पहनकर मासूमों का शिकार कर रहे थे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala