साल 2025 में यादव का औसत पूरे साल 14 का आंकड़ा भी नहीं छू सका. वास्तव में अगर टीम जीत न रही होती, तो कौन जानता है कि सूर्या की कप्तानी कभी की चली गई होती! टीम इंडिया एक के बाद एक जीतती रही, तो यादव बचे रहे. इस साल सूर्या का प्रदर्शन सुधार, लेकिन वर्ल्ड कप में बड़ी टीमों के खिलाफ वह नाकाम रहे. बहरहाल यादव की जगह जब फंसती दिख रही है, तो जाहिर है कि इसी के साथ ही कप्तानी पर भी खतरा मंडरा रहा है. सूर्य जाएंगे, तो जाहिर कि बोर्ड को नया कप्तान भी बनाना होगा. और वजह सिर्फ यही नहीं है. वजह यह भी बड़ी हो चली है कि साल 2028 विश्व कप के समय सूर्या 38 साल के हो जाएंगे. ऐसे में बोर्ड ने भावी कप्तान की ओर देखना शुरू कर दिया है. कई खिलाड़ी अगले कप्तान बनने की रेस में हैं. चलिए क्रमश जानिए कि रेस में कौन सबसे आगे खड़ा है.

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5. हार्दिक पांड्या
एक समय टीम इंडिया को जोड़ने वाली सबसे संतुलित कड़ी हार्दिक पांड्या रोहित के बाद टीम इंडिया के कप्तान बनने की होड़ में सबसे आगे थे. बोर्ड के अधिकारी उन्हें अगले कप्तान के रूप में देखना चाहते थे, आधिकारिक प्रसारक ने प्रोमो चलाना शुरू कर दिया था, लेकिन 2024 टी-20 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हार्दिक खिताब जीतने के बाद साथी खिलाड़ियों का भरोसा नहीं जीत सके. कई बातें पांड्या के खिलाफ गईं. नतीजा यह रहा कि कहीं से कहीं दूर तक दिखाई नहीं पड़ रहे सूर्यकुमार यादव अगले कप्तान बन गए. हार्दिक मन मारकर रह गए, लेकिन पिछले दो सालों में पांड्या ने भारत की सफलता में लगातार योगदान दिया है. कई अहम पारियां खेली हैं. उनकी परिपक्तवा बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद उनका दावा नंबर पांच पर ही है.
4. अक्षर पटेल
साल 2024 विश्व कप में हार्दिक के जाने के बाद शुभमन गिल इसी साल श्रीलंका में टीम के उप-कप्तान रहे, तो एशिया कप में भी लेकिन अब वह पूरी तरह से पॉलिसी से बाहर हो चुके हैं. और इसके बाज पिछले साल जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज से लेकर टी20 विश्व कप तक टीम के उप-कप्तान रहे, लेकिन वह एक दो मैचों में बाहर भी रहे, तो उनका प्रदर्शन भी उम्मीदों से कमतर रहा. और अब जब टीम चयन के नए समीकरण बन रहे हैं या बन चुके हैं, चयन के नए मानक बन रहे हैं, तो लगता नहीं कि अक्षर बोर्ड की पॉलिसी में 2028 विश्व कप की प्लानिंग में फिट बैठेंगे,लेकिन वह पांच में से एक मजबूत दावेदार हैं.

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3. इशान किशन
इस साल टी20 विश्व कप के लिए टीम में एकदम से गिल को पछाड़कर नीति में शामिल हुए इशान किशन ने तभी से लेकर अपने ग्राफ को ऊंचा किया है. इससे पहले पिछले साल उन्होंने अपनी कप्तानी में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ झारखंड को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जिताकर बड़ा प्वाइंट साबित किया. विश्व में प्रदर्शन अच्छा रहा, तो हालात (पैट कमिंस चोट के कारण हटे) ने उन्हें आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद का कप्तान बना दिया. शुरुआती मैचों में इशान ने कप्तानी और बल्ले से प्रभावित किया है. सीनियर खिलाड़ियों ने उनकी कप्तानी की सराहना की है. और यह आवाज BCCI और अगरकर एंड कंपनी तक जरूर पहुंचेगी.
2. संजू सैमसन
इसमें दो राय नहीं कि इस साल टी20 विश्व कप में आखिरी तीन मैचों में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने संजू सैमसन अगला कप्तान बनने के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक है. अभी उनकी उम्र 31 साल है और वर्तमान नीति (विकेटकीपर ओपनर होना चाहिए) और कप्तानी के अनुभव में पूरी तरह साल 2028 टी20 विश्व कप की प्लानिंग में फिट बैठते हैं. सैमसन के पास कई साल आईपीएल में राजस्थान की कप्तानी करने का अनुभव है, तो अब उन्होंने चेन्नई के लिए शतक जड़कर फॉर्म को फिर से पकड़ लिया है. अगर वह अपना प्रदर्शन बतौर ओपनर ऐसे ही जारी रखते हैं, तो वह अगले टी20 कप्तान हो सकते हैं.

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1. श्रेयस अय्यर
बिना किसी शक और सवाल के अगर कोई खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव की जगर और कप्तानी दोनों ही लेने की रेस में सबसे आगे खड़ा है, वह पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर हैं. पिछले साल अपनी कप्तानी में पंजाब को फाइनल में पहुंचाने और बल्ले से तूफानी प्रदर्शन के बावजूद अय्यर का विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह बना बना पाना बहुत ही ज्यादा फैंस को खला. वह दुर्भाग्यशाली रहे. अय्यर ने बतौर कप्तान न केवल पंजाब किंग्स के लिए, बल्कि मुंबई के लिए विजय हजारे जैसे टूर्नामेंट में भी साबित किया. श्रेयस अय्यर नंबर-4 पर ही खेलते हैं और इसी क्रम पर सूर्यकुमार यादव. आज जो हालात हैं, वहां से भारत के लिए यादव की एक-एक मैच की नाकामी उन्हें आलोचना और सख्त सवालों के घेरे में लाएगी, तो यही नाकामी अगरकर एंड कंपनी को अय्यर को नजदीक लेकर आएगी. कुल मिलाकर श्रेयस अय्यर वह खिलाड़ी हैं, जो सूर्यकुमार यादव के विकल्प नंबर-1 हैं. बाकी आप तो जानते ही हैं कि यह भारत की क्रिकेट है! यहां कब क्या हो जाए, कौन कप्तान बन जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता ! इस लिहाज से यह साल बहुत ही अहम है. देखते हैं कि यादव क्या करते हैं क्योंकि उनके 'फल' पर पर ही कप्तानी का 'प्रतिफल' ज्यादा टिका है.