नेपाल में 2006 के बाद के नेताओं और अफसरों की संपत्ति की जांच के लिए आयोग गठित
Samachar Nama Hindi April 16, 2026 03:42 AM

काठमांडू, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल सरकार ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए पिछले दो दशकों में सत्ता में रहे प्रमुख नेताओं और वरिष्ठ अफसरों की संपत्ति की जांच के लिए एक आयोग बनाने की घोषणा की है। यह कदम बढ़ते भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उठाया गया है।

बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि 2006 से अब तक सत्ता में रहे लोगों की संपत्ति की जांच की जाएगी। 2006 वही वर्ष था जब दूसरे जनआंदोलन के बाद तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र शाह की 'निरंकुश' सरकार गिर गई थी।

इस दौरान नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और माओवादी केंद्र जैसी पार्टियों ने देश चलाया। इन पार्टियों के नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने सत्ता का गलत इस्तेमाल करके काफी संपत्ति इकट्ठा की।

पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ पर भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच चल रही है।

सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि पांच सदस्यों का एक आयोग बनाया जाएगा, जिसकी अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज राजेन्द्र कुमार भंडारी करेंगे। यह आयोग 2006 से 2026 तक सत्ता में रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी जुटाएगा, उसकी जांच करेगा और उसे वेरिफाई करेगा।

यह फैसला प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह की नई सरकार के 100 सूत्रीय सुधार एजेंडे का हिस्सा है। 27 मार्च को की गई घोषणा के मुताबिक, पहले 2006 से 2026 तक के मामलों की जांच होगी, और फिर दूसरे चरण में 1992 से 2006 तक के मामलों को देखा जाएगा।

पोखरेल ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से, सबूतों के आधार पर की जाएगी और आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर काफी नाराजगी दिखी थी। इन्हीं प्रदर्शनों के चलते केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।

इसके बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार बनी, जिसने पांच मार्च को चुनाव कराए। इन चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और करीब दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। अब इस पार्टी के नेता बलेन्द्र शाह प्रधानमंत्री हैं और उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सख्त कदम उठा रही है।

--आईएएनएस

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