टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ी नासिक की एक बीपीओ यूनिट में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि कंपनी की महिला एचआर (HR) मैनेजर और ऑपरेशंस हेड ने आरोपी का पक्ष लेते हुए पीड़िता को शिकायत दर्ज करने से रोका था। अधिकारियों के अनुसार इन महिला अधिकारियों ने पीड़िता से यहां तक कहा कि ऐसी चीजें होती रहती हैं।
HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज हो गई है। उस पर धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। FIR में दावा है कि वह कर्मचारियों को बुर्का पहनने और इस्लामी रीति-रिवाज अपनाने के लिए कहती थी. नौ केस दर्ज होने के बाद वह फरार है।
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अधिकारियों की भूमिका पर पुलिस का बयाननासिक के पुलिस कमिश्नर के मुताबिक यूनिट की ऑपरेशंस और एचआर हेड ने कथित तौर पर उत्तरजीवी को कानूनी कार्रवाई करने से हतोत्साहित किया। जांच में पाया गया है कि इस पूरे मामले में सात पुरुष आरोपी महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए एक समन्वित (Coordinated) तरीके से काम कर रहे थे।
मामले की मुख्य बातें:कुल केस और गिरफ्तारियाँ: पुलिस ने अब तक कुल 9 मामले दर्ज किए हैं। इस सिलसिले में 8 लोगों (7 पुरुष और 1 महिला) को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक अन्य महिला आरोपी फिलहाल फरार है।
हिरासत : गिरफ्तार महिला ऑपरेशंस मैनेजर को 28 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
आरोपियों की पहचान : मुख्य पुरुष आरोपियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसार और शाहरुख शेख के रूप में हुई है।
केंद्रीय एजेंसियों की एंट्री और जांचमामले में उग्रवादी संगठनों की संलिप्तता और विदेशी फंडिंग की अटकलों पर कमिश्नर ने बताया कि जांच जारी है और हमने SID, ATS और NIA जैसी एजेंसियों से इनपुट मांगे हैं। पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।"
क्या है पूरा विवाद? दर्ज किए गए 9 मामलों में एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत भी शामिल है, जिसने जबरन धर्मांतरण की कोशिश और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इससे पहले, 8 महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। महिलाओं का आरोप है कि एचआर विभाग ने उनकी शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
TCS की सीओओ (COO) आरती सुब्रमण्यन द्वारा इस मामले की व्यापक जांच की जा रही है ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।'
पुलिस ने बताया कि कार्यस्थल पर जांच के लिए महिला उपायुक्त और अन्य महिला अधिकारियों को तैनात किया गया था। वहां हुई काउंसलिंग सत्रों के बाद कई और पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग कर सहकर्मियों को प्रताड़ित करते थे। Edited by : Sudhir Sharma