Jodhpur Child Marriage Ban: आखातीज पर बाल विवाह किया तो खैर नहीं हलवाई, पंडित और बैंड-बाजा वालों पर भी गिरेगी गाज
Newsindialive Hindi April 17, 2026 06:43 PM

News India Live, Digital Desk: राजस्थान में आगामी 19 अप्रैल (अक्षय तृतीया) और 1 मई (पीपल पूर्णिमा) को होने वाले अबूझ सावे पर बाल विवाह की आशंका को देखते हुए जोधपुर जिला प्रशासन 'फुल एक्शन' मोड में है। जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने स्पष्ट कर दिया है कि बाल विवाह अब केवल एक पारिवारिक मामला नहीं, बल्कि एक सामूहिक अपराध माना जाएगा। इस बार प्रशासन ने उन सभी सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय कर दी है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विवाह समारोह का हिस्सा बनते हैं।'पूरी बारात' पर होगी कानूनी कार्रवाईप्रशासन ने इस बार कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए साफ किया है कि यदि कहीं बाल विवाह पाया गया, तो निम्नलिखित पर भी मुकदमा दर्ज होगा:पंडित/निकाह पढ़ाने वाले: जो फेरे या निकाह करवाएंगे।हलवाई और टेंट हाउस: जो खाना बनाएंगे या सजावट करेंगे।बैंड-बाजा और ट्रांसपोर्टर: जो संगीत बजाएंगे या बारातियों को ढोएंगे।प्रिंटिंग प्रेस: जिन्होंने बिना उम्र की जांच किए शादी के कार्ड छापे। सभी सेवा प्रदाताओं से लिखित आश्वासन लिया जा रहा है कि वे किसी भी ऐसे आयोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे जहाँ वर-वधू की उम्र कानूनी (लड़का 21, लड़की 18) से कम हो।शादी के कार्ड पर जन्मतिथि छापना अनिवार्यप्रशासन ने प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के लिए नए और कड़े नियम लागू किए हैं:उम्र का प्रमाण: कार्ड छापने से पहले वर-वधू के आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र की प्रति लेना अनिवार्य है।कार्ड पर अंकन: निमंत्रण पत्र पर दोनों की जन्मतिथि स्पष्ट रूप से छपनी चाहिए।पुलिस जांच: पुलिस किसी भी समय प्रेस के रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। लापरवाही मिलने पर प्रेस का लाइसेंस रद्द हो सकता है।24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूमबाल विवाह की गुप्त सूचना देने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो 16 अप्रैल से 15 मई तक सक्रिय रहेगा।हेल्पलाइन नंबर: आमजन 0291-2650349 और 0291-2650350 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं।पहचान गुप्त: सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।गांव-गांव बिछाया गया 'निगरानी तंत्र'कलेक्टर ने त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र (Monitoring System) लागू किया है:ग्राम स्तर: सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी और बीट कॉन्स्टेबल की टीम हर घर पर नजर रखेगी।तहसील स्तर: तहसीलदार और थानाधिकारी को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।नोडल अधिकारी: महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को पूरे जिले की कमान सौंपी गई है।कलेक्टर की दो टूक: 'परंपरा के नाम पर अपराध बर्दाश्त नहीं'जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 का उल्लंघन करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ेगी। उन्होंने अपील की है कि लोग सामाजिक दबाव या पुरानी परंपराओं की आड़ में बच्चों का भविष्य बर्बाद न करें।

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