नोटों पर गांधी जी की एंट्री से पहले किसकी तस्वीर थी, RBI ने क्यों लिया फोटो बदलने का फैसला'
Newshimachali Hindi April 18, 2026 05:42 AM

हर दिन हमारे हाथों से गुजरने वाले नोटों पर छपी एक तस्वीर को हम इतनी आदत से देखते हैं कि दिमाग में यह सवाल ही नहीं आता कि इन नोट पर महात्मा गांधी यह चेहरा हमेशा से था, इससे पहले कोई और भी नोटों पर था.

आज महात्मा गांधी भारतीय करेंसी की पहचान हैं, लेकिन ऐसा नहीं कि आजादी के बाद से ही नोटों पर उनका चेहरा छपा हो. दरअसल, भारतीय नोटों की कहानी में चेहरे बदले हैं, फैसले बदले हैं और इस बदलाव के पीछे देश की सोच और पहचान छिपी रही है. आइए जानें कि महात्मा गांधी से पहले नोट पर किसका चेहरा छपा था.

भारतीय नोटों पर तस्वीरों का बदलता इतिहास

भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत औपनिवेशिक दौर में हुई. उस समय नोट केवल लेन-देन का जरिया नहीं थे, बल्कि सत्ता का प्रतीक भी माने जाते थे, इसलिए ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय नोटों पर अंग्रेज शासकों की तस्वीरें छापी जाती थीं.

आजादी से पहले किनकी तस्वीरें छपती थीं?

ब्रिटिश राज में जारी होने वाले भारतीय नोटों पर सबसे पहले किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी. उनके बाद किंग जॉर्ज षष्ठम के चित्र वाले नोट प्रचलन में आए. ये नोट ब्रिटेन में छपते थे और इन्हें भारत में चलन के लिए भेजा जाता था. इन नोटों पर अंग्रेजी राजशाही की स्पष्ट छाप दिखती थी, जो उस दौर की राजनीतिक हकीकत को दर्शाती थी.

आजादी के बाद बड़ा फैसला

1947 में आजादी के बाद भारत सरकार के सामने एक अहम सवाल था कि क्या नए भारत की करेंसी पर भी किसी व्यक्ति की तस्वीर होनी चाहिए? उस समय तय किया गया कि नोटों पर किसी व्यक्ति की तस्वीर नहीं होगी. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि नई भारतीय पहचान किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की भावना से जुड़े. इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चिह्न को प्रमुखता दी. साथ ही खेती, उद्योग, विज्ञान और विकास से जुड़े चित्रों को नोटों की पहचान बनाया गया.

पहली बार गांधी जी की एंट्री कब हुई?

महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में नोटों पर दिखाई दी. यह मौका था उनकी जन्म शताब्दी का. उस समय जारी किए गए स्मारक नोट पर गांधी जी बैठे हुए नजर आते हैं और पीछे सेवाग्राम आश्रम की झलक दिखती है. हालांकि यह नोट सीमित उद्देश्य के लिए था और इसे नियमित करेंसी नहीं माना गया.

1987 और 1996 बना निर्णायक मोड़

1987 में जब 500 रुपये का नोट दोबारा जारी किया गया, तब उस पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई गई, लेकिन असली बदलाव 1996 में आया, जब RBI ने महात्मा गांधी सीरीज शुरू की. इसके बाद से भारत में जारी होने वाले सभी नोटों पर गांधी जी का चेहरा अनिवार्य रूप से छपने लगा. इस फैसले के पीछे तर्क साफ था कि महात्मा गांधी न केवल आजादी की लड़ाई के सबसे बड़े प्रतीक थे, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और सत्य के प्रतिनिधि माने जाते थे.

RBI ने गांधी जी को ही क्यों चुना?

RBI के अनुसार, महात्मा गांधी का चेहरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है और उनकी छवि राजनीतिक विवादों से ऊपर मानी जाती है. यही वजह है कि उन्हें भारतीय करेंसी की स्थायी पहचान बनाया गया. सुरक्षा कारणों से भी एक ही चेहरे को सभी नोटों पर रखने से डिजाइन और पहचान में एकरूपता बनी रहती है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.