26 साल पुराने केस में CBI के जॉइंट डायरेक्टर दोषी करार, तीस हजारी कोर्ट का बड़ा फैसला
TV9 Bharatvarsh April 19, 2026 06:42 AM

दिल्ली की एक अदालत ने दो दशक से अधिक समय पहले एक छापेमारी के दौरान भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के एक अधिकारी के आवास में जबरन घुसने और उनके साथ मारपीट करने के मामले में दो सीबीअई अधिकारियों को दोषी ठहराया है. न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वीके पांडे और रमनीश के खिलाफ मामले की सुनवाई की.

1994 बैंच के CBI अधिकारी रामनीश गीर को राष्ट्रपति ने पुलिस मेडल पदक से सम्मानित किया था. रमनीश मौजूदा समय में गुवाहाटी में CBI के जॉइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात है. साल 2000 में जब यह छापेमारी हुई थी तब रमनीश पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे.

सीबीआई के दो अधिकारी दोषी

कोर्ट ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि 19 अक्टूबर 2000 को आरोपियों द्वारा ली गई तलाशी और गिरफ्तारी की पूरी कार्यवाही कानून द्वारा उन्हें दी गई शक्तियों का उल्लंघन थी. उन्होंने कहा कि उस कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को निष्प्रभावी करना था, जिसमें शिकायतकर्ता आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के निलंबन की समीक्षा का निर्देश दिया गया था. अदालत ने दोनों अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाने के लिए मामले को अगली कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया है.

बता दें कि तीस हजारी कोर्ट ने साल 2000 में आईआरएस अधिकारी के घर पर दुर्भावनापूर्ण ढंग से छापेमारी के लिए सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी ठहराया. कोर्ट ने कहा कि अधिकारी की गिरफ्तारी सीएटी के आदेश को रद्द करने के लिए एक सुनियोजित साजिश थी.

इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा

शनिवार के एक ऐतिहासिक फैसले में, रामनीश जो वर्तमान में सीबीआई के संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं (जो वर्ष 2000 में सीबीआई के एसआईयू-8 में पुलिस उप अधीक्षक के पद पर तैनात थे), और वीके पांडे, दिल्ली के सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त (उस समय सीबीआई के एसआईयू-9 में इंस्पेक्टर) को चोट पहुंचाने, उपद्रव करने, आपराधिक अतिक्रमण करने और सामान्य इरादे से किए गए कृत्यों के लिए दोषी ठहराया गया है.

शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल हैं, जो 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं और उस समय दिल्ली जोन में प्रवर्तन उप निदेशक के पद पर कार्यरत थे. उन्हें सीबीआई के दोनों मामलों में बरी कर दिया गया था.

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