ग्लोबल टेंशन, लोकल इम्पैक्ट: मिडिल ईस्ट टेंशन ने थामी LPG की रफ्तार, खपत में आई 13% की कमी
TV9 Bharatvarsh April 19, 2026 05:44 PM

मार्च में भारत में कुकिंग गैस (LPG) की खपत में 13 फ़ीसदी की भारी गिरावट आई. इसकी सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट टेंशन है. जिसकी वजह से सप्लाई में रुकावटें आईं, जिससे घरेलू रसोई और कमर्शियल, दोनों तरह के यूजर्स के लिए गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा. मार्च में LPG की खपत 2.379 मिलियन टन रही, जो पिछले साल इसी समय हुई 2.729 मिलियन टन की खपत से 12.8 फीसदी कम थी. भारत अपनी LPG की जरूरत का लगभग 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसका ज्यादातर हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है.

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह रास्ता लगभग बंद हो गया था. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से सप्लाई में रुकावट आने के कारण, सरकार ने होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों और उद्योगों को होने वाली LPG की सप्लाई में कटौती कर दी है, ताकि घरेलू रसोई के लिए गैस की उपलब्धता बनी रहे.

थोक एलपीजी की सेल में गिरावट

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, मार्च में घरेलू परिवारों को बेचे गए LPG सिलेंडरों की संख्या में 8.1 फ़ीसदी की गिरावट आई और यह 2.219 मिलियन टन रही, जबकि गैर-घरेलू यूजर्स को बेचे गए सिलेंडर्स की संख्या में लगभग 48 फीसदी की कमी आई. थोक LPG की बिक्री में 75.5 फ़ीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. PPAC के आंकड़ों से पता चला कि खपत में कमी आई है, जबकि सरकार का दावा था कि LPG की सप्लाई सामान्य है और घरेलू यूजर्स की सभी मांगें पूरी की जा रही हैं. इस कमी को पूरा करने के लिए, सरकार ने रिफाइनरीज को निर्देश दिया कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले फीडस्टॉक को LPG उत्पादन बढ़ाने की ओर मोड़ दें. PPAC के आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से मार्च में घरेलू LPG का उत्पादन बढ़कर 1.4 मिलियन टन हो गया, जो एक साल पहले 1.1 मिलियन टन था.

घरेलू प्रोडक्शन में इजाफा

इस प्रयास के कारण, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में LPG का उत्पादन बढ़कर 13.1 मिलियन टन हो गया, जबकि पिछले दो वित्त वर्षों में यह 12.8 मिलियन टन था. मार्च के महीने को अपवाद मान लें, तो भी मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में LPG की खपत में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 33.212 मिलियन टन तक पहुंच गई. हाल के वर्षों में LPG की खपत में लगातार बढ़ोतरी हुई है. इसकी मुख्य वजह सरकार के वे प्रयास हैं जिनके तहत लकड़ी और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों की जगह साफ-सुथरे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है. युद्ध के कारण कई खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के रुकने से, मार्च में जेट फ्यूल या ATF की खपत में लगभग कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. यह 807,000 टन रही, जबकि एक साल पहले इसकी बिक्री 801,000 टन थी.

पेट्रोल और डीजल की सेल में इजाफा

युद्ध से प्रभावित इन दो ईंधनों के अलावा, पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई. पेट्रोल की बिक्री 7.6 प्रतिशत बढ़कर 3.78 मिलियन टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 प्रतिशत बढ़कर 8.727 मिलियन टन हो गई. पूरे वित्त वर्ष के लिए, ATF की बिक्री 2 प्रतिशत बढ़कर 9.161 मिलियन टन हो गई, जबकि पेट्रोल की खपत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 42.586 मिलियन टन हो गई. डीजल की खपत 3.6 प्रतिशत बढ़कर 94.705 मिलियन टन हो गई. औद्योगिक ईंधन नेफ्था और फ्यूल ऑयल में क्रमशः 9.9 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की खपत में 2025-26 में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 8.84 मिलियन टन तक पहुंच गई.

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