राजधानी दिल्ली में अब कॉमर्शियल गाड़ियों के लिए एंट्री करना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है. एमसीडी (MCD) ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति चार्ज (Environmental Compensation Fee) यानी ECC की दरों में बढ़ोतरी कर दी है. यह बढ़ोतरी खास तौर पर बड़े ट्रकों यानी दो एक्सल और तीन-चार एक्सल वाले वाहनों पर की गई है. निगम के नए आदेश के अनुसार, दो एक्सल वाले ट्रकों के लिए पहले जहां 1400 रुपये का चार्ज लगता था, अब इसे बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है. वहीं तीन और चार एक्सल वाले ट्रकों के लिए ECC 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है. इस बढ़ोतरी से साफ है कि अब दिल्ली में भारी वाहनों का आना काफी महंगा हो गया है. आइए विस्तार से जानते हैं.
दरअसल, दिल्ली में हर दिन बड़ी संख्या में कॉमर्शियल वाहन प्रवेश करते हैं, जिससे इस बढ़ोतरी का असर काफी बड़ा होगा. आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 3500 दो एक्सल वाले ट्रक और लगभग 1500 तीन और चार एक्सल वाले ट्रक दिल्ली में आते हैं. अगर कुल आंकड़ों की बात करें, तो रोजाना लगभग 70,000 कॉमर्शियल वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं. इनमें कार, हल्के वाणिज्य वाहन, बस और ट्रक शामिल हैं. CMS डेटा के मुताबिक, रोजाना करीब 29,000 कार, 6,000 लाइट कमर्शियल वाहन, 2,800 बसें, 3,400 दो एक्सल ट्रक, 1,000 तीन एक्सल वाहन और 1,100 भारी वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं. इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के आने से यह साफ है कि टोल बढ़ने का असर बड़े स्तर पर देखने को मिलेगा.
ECC चार्ज बढ़ने से छोटे व्यापारियों पर भी असर साफ दिखाई देगा. जो लोग पैकर्स एंड मूवर्स, डिलीवरी या छोटे स्तर पर सामान की ढुलाई करते हैं, उनके लिए अब सेवाएं देना महंगा हो जाएगा. कई छोटे बिजनेस अपने दाम बढ़ाने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे ग्राहकों को ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा और छोटे व्यापारियों की कमाई पर असर पड़ सकता है.
ECC बढ़ने के बाद कुछ ट्रांसपोर्टर दिल्ली में एंट्री कम करने या टाइम बदलने की कोशिश कर सकते हैं. इससे ट्रैफिक पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. कुछ कंपनियां रात के समय या कम भीड़ वाले समय में गाड़ियां भेजने की योजना बना सकती हैं, ताकि लागत को थोड़ा कम किया जा सके. इससे दिन के समय ट्रैफिक थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से फर्क दिखने में समय लगेगा.
ECC टोल बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के काम से जुड़े हैं. मोटरसाइकिल डिलीवरी, पैकर्स एंड मूवर्स और अन्य सामान ढुलाई करने वाले व्यवसायों की लागत अब बढ़ जाएगी. जब ट्रकों का खर्च बढ़ेगा, तो कंपनियां इस एक्स्ट्रा खर्च को ग्राहकों से वसूलने की कोशिश करेंगी. इसका मतलब है कि सामान ढुलाई और डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं. इससे छोटे व्यापारियों और बिजनेस करने वालों को ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा.
ECC चार्ज बढ़ने का एक सकारात्मक असर यह भी हो सकता है कि लोग अब ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की तरफ बढ़ें. इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों की मांग धीरे-धीरे बढ़ सकती है, क्योंकि इन पर कम चार्ज या छूट मिलती है. सरकार का भी यही मकसद है कि प्रदूषण कम किया जाए और साफ फ्यूल का इस्तेमाल बढ़े. आने वाले समय में यह बदलाव ट्रांसपोर्ट सेक्टर को नया रूप दे सकता है.
कॉमर्शियल वाहनों की लागत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा. जब ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, तो डेली यूज के सामान जैसे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य चीजों की कीमत बढ़ सकती है. इसके अलावा, शिफ्टिंग सर्विस, ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं के दाम भी बढ़ सकते हैं. यानी आपको रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
सरकार और एमसीडी का मानना है कि ECC बढ़ाने का मकसद प्रदूषण को कम करना है. ज्यादा चार्ज लगाकर पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, यह कदम पर्यावरण के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन इससे व्यापार और आम लोगों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा. आने वाले समय में लोग CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ज्यादा बढ़ सकते हैं.