बैटरी की टेंशन जाएगी मीलों दूर, Galaxy S27 सीरीज में सैमसंग करेगी इस धांसू टेक्नोलॉजी का यूज
एबीपी टेक डेस्क April 22, 2026 04:12 PM

Samsung Galaxy S27 Series: सैमसंग की Galaxy S26 series को लॉन्च हुए अभी कुछ ही हफ्ते बीते हैं और अभी से Galaxy S27 सीरीज से जुड़ी लीक्स सामने आने लगी हैं. एक ताजा लीक में दावा किया गया है कि सैमसंग यूजर्स की बैटरी की टेंशन को जड़ से खत्म करना चाहती है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी अपनी अपकमिंग फ्लैगशिप सीरीज में सिलिकॉन-कार्बन बैटरी को यूज कर सकती है, जो ज्यादा कैपेसिटी को सपोर्ट करती है. ये बैटरी आने के बाद फोन को बार-बार चार्ज करने का झंझट खत्म हो जाएगा और यूजर बैटरी डेड होने की चिंता के बिना फोन को यूज कर पाएगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

अभी कौन-सी बैटरी यूज कर रही है सैमसंग?

ऐप्पल की तरह सैमसंग पिछले कई सालों से ग्रेफाइट-बेस्ड लिथियम-आयन बैटरी को यूज करते आ रही है. Galaxy S21 Ultra से लेकर हाल ही में लॉन्च हुई Galaxy S26 सीरीज तक में कंपनी ने 5,000mAh की कैपेसिटी वाली बैटरी को यूज किया है. अब धीरे-धीरे कई कंपनिया लिथियम-आयन बैटरी को छोड़कर सिलिकॉन-कार्बन बैटरी यूज करने लगी है. अब रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सैमसंग भी इस राह पर चलने का मन बना रही है.

पावरबैंक के बराबर की बैटरी टेस्ट कर रही है सैमसंग

रिपोर्ट्स के अनुसार, सैमसंग हाई-कैपेसिटी वाली सिलिकॉन-कार्बन बैटरी टेस्ट कर रही है, जिनकी कैपेसिटी 12,000mAh, 18,000mAh और 20,000mAh है. अभी तक ये बैटरियां सैमसंग का टारगेट हासिल नहीं कर पाई है. सैमसंग ने इनमें 1500 चार्जिंग साइकिल का टारगेट रखा है, लेकिन अभी तक ये बैटरियां 960 चार्ज साइकिल का गोल ही हासिल कर पाई हैं. ऐसे में अभी कंपनी को इन पर और काम करने की जरूरत है. 

क्या होती हैं सिलिकॉन कार्बन बैटरी?

सिलिकॉन-कार्बन बैटरी नई तरह की बैटरी सेल है, जो सिलिकॉन एनोड्स के साथ आती है. इसमें एनर्जी डेन्सिटी ज्यादा होती है, जिसका मतलब है कि यह कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती है. ट्रेडिशनल लिथियम-आयन बैटरी की बात करें तो इनमें ग्रेफाइट एनोड होते हैं. इनकी एनर्जी डेन्सिटी 250-300 Wh/kg ग्राम होती है, जबकि इनकी तुलना में सिलिकॉन-कार्बन बैटरी 400-500 Wh/kg रेंज के साथ आती है. इसका फायदा यह होता है कि बैटरी का साइज बड़ा किए बिना ये कैपेसिटी को सपोर्ट कर सकती है. इससे फोन के साइज पर भी असर नहीं पड़ता. कई चाइनीज कंपनियां पहले ही अपने स्मार्टफोन्स में इस टेक्नोलॉजी का यूज कर रही हैं.

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