Noida to Prayagraj Via Road Best Route: नोएडा से प्रयागराज तक सड़क यात्रा अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज, विकल्पों से भरपूर और प्लानिंग-ड्रिवन हो चुकी है. उत्तर प्रदेशमें तेजी से विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने इस रूट को तीन अलग-अलग कैटेगरीज में बांट दिया है- हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे रूट, पारंपरिक नेशनल हाईवे और जल्द शुरू होने वाला गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर. तीनों विकल्प दूरी में लगभग समान हैं, लेकिन समय, टोल और ईंधन खर्च के लिहाज से बड़ा अंतर पैदा करते हैं.
आम तौर पर नोएडा से प्रयागराज की दूरी 670 से 680 किलोमीटर के बीच मानी जाती है, चाहे आप कोई भी रूट चुनें. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितना समय देना चाहते हैं और कितना खर्च उठाने को तैयार हैं.
एक्सप्रेसवे रूट: तेज, आरामदायक लेकिन महंगावर्तमान में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रूट यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए जाता है. नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे और फिर आगरा से लखनऊ तक हाई-स्पीड कॉरिडोर, इसके बाद कानपुर और फतेहपुर के रास्ते प्रयागराज पहुंचा जाता है. इस रूट पर कुल यात्रा समय आमतौर पर 9 से 10 घंटे के बीच रहता है. सड़कें चौड़ी, सीधी और एक्सेस-कंट्रोल्ड होने के कारण ड्राइविंग अनुभव बेहतर रहता है और औसत स्पीड 90–100 किमी/घंटा तक बनी रहती है.
टोल और पेट्रोल खर्च?हालांकि, इसका सीधा असर टोल पर पड़ता है. यमुना और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे समेत पूरे सफर का टोल करीब 1,100 रुपये से 1,300 रुपये के बीच बैठता है. दूरी के अनुपात में देखें तो टोल शुल्क लगभग 1.7 रुपये से 1.9 रुपये प्रति किलोमीटर बैठता है. ईंधन खर्च जोड़ें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है. एक्सप्रेसवे पर बेहतर माइलेज (करीब 16 किमी/लीटर) मानें, तो 680 किमी के सफर में लगभग 42–43 लीटर पेट्रोल खर्च होगा. 95.7 रुपये प्रति लीटर की दर से यह खर्च करीब 4,000 रुपये के आसपास बैठता है. इस तरह कुल यात्रा लागत 5,200 रुपये से 5,400 रुपये तक पहुंच जाती है.
NH-19 रूट: कम टोल, ज्यादा समयदूसरा विकल्प है पारंपरिक नेशनल हाईवे- NH-19/34, जिसे ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से भी जाना जाता है. यह रूट अलीगढ़, हाथरस, कानपुर और फतेहपुर जैसे शहरों से होकर गुजरता है. इस रूट की दूरी लगभग समान (करीब 670 किमी) है, लेकिन ट्रैफिक, सिग्नल और लोकल मूवमेंट के कारण यात्रा समय बढ़कर 11 से 13 घंटे तक पहुंच जाता है. टोल की बात करें तो यह रूट सबसे सस्ता है. कुल टोल लगभग 600 रुपये से 800 रुपये के बीच रहता है, जो करीब 1 रुपये से 1.2 रुपये प्रति किलोमीटर की दर बनाता है.
पेट्रोल खर्च?हालांकि, यहां बार-बार रुकने और ट्रैफिक के कारण माइलेज गिरकर करीब 14 किमी/लीटर तक आ जाता है. ऐसे में पेट्रोल की खपत लगभग 47–48 लीटर तक पहुंच सकती है, जिसकी लागत 4,500 रुपये से 4,600 रुपये के बीच बैठती है. टोल और पेट्रोल जोड़ने पर कुल खर्च करीब 5,200 रुपये से 5,300 रुपये रहता है. यानी यह रूट सस्ता जरूर है, लेकिन समय और ड्राइविंग थकान ज्यादा मांगता है.
गंगा एक्सप्रेसवे: सबसे तेज, लेकिन सबसे महंगा टोलनोएडा से प्रयागराज यात्रा का समीकरण गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद बदलने वाला है. मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड, एक्सेस-कंट्रोल्ड और आधुनिक तकनीक से लैस होगा. नोएडा से पहले मेरठ तक करीब 80–85 किलोमीटर का सफर जोड़ने पर कुल दूरी लगभग 680 किमी ही रहती है, लेकिन समय घटकर 7.5 से 8.5 घंटे तक आ सकता है. इस रूट की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड और स्मूथ ड्राइव होगी, लेकिन टोल सबसे ज्यादा होगा. अनुमानित दर 2.55 रुपये प्रति किमी के हिसाब से मेरठ से प्रयागराज तक ही करीब 1,500 रुपये से अधिक का टोल बनेगा. नोएडा–मेरठ कनेक्टिविटी जोड़ने पर कुल टोल 1,600 रुपये से 1,650 रुपये तक पहुंच सकता है.
पेट्रोल खर्च?हालांकि, बेहतर ड्राइविंग कंडीशन के कारण माइलेज 17 किमी/लीटर तक मिल सकता है. इससे कुल पेट्रोल खपत लगभग 40 लीटर और खर्च करीब 3,800 रुपये के आसपास रहेगा. टोल और पेट्रोल मिलाकर कुल यात्रा लागत करीब 5,400 रुपये से 5,500 रुपये तक पहुंचती है. यानी यह रूट थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन समय की सबसे ज्यादा बचत देता है.
एक नजर में: निष्कर्ष| यमुना + आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे | ~680 किमी | 9–10 घंटे | ₹1,100 – ₹1,300 | ~42–43 लीटर और ~₹4,050 – ₹4,100 | ~₹5,200 – ₹5,400 |
| NH-19 / NH-34 (GT रोड) | ~670 किमी | 11–13 घंटे | ₹600 – ₹800 | ~47–48 लीटर और ~₹4,500 – ₹4,600 | ~₹5,200 – ₹5,300 |
| गंगा एक्सप्रेसवे (मेरठ के जरिए) | ~680 किमी | 7.5–8.5 घंटे | ₹1,600 – ₹1,650 | ~40 लीटर और ~₹3,800 | ~₹5,400 – ₹5,500 |
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अगर केवल खर्च की बात करें तो NH-19 रूट थोड़ा सस्ता पड़ता है, लेकिन इसमें 2 से 4 घंटे ज्यादा लगते हैं. यमुना–आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे रूट वर्तमान में सबसे संतुलित विकल्प है, जहां समय भी बचता है और खर्च भी नियंत्रित रहता है. वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे इस पूरे सफर को नई परिभाषा देने वाला है. यह रूट समय के लिहाज से सबसे आगे होगा, लेकिन टोल के कारण इसे “प्रीमियम” विकल्प माना जाएगा.