नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। निजी स्कूल नियमों का उल्लंघन करते हुए महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें छात्रों पर थोप रहे हैं। इस शिकायत के मिलने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है।
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक शिकायत पर संज्ञान लिया।
शिकायत में कहा गया था कि कई निजी स्कूल, एनसीईआरटी या एससीईआरटी की किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में काफी महंगी होती हैं। इससे परिवारों पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता है। एनसीईआरटी की किताबें सस्ती रखने के लिए सब्सिडी दी जाती है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि यह प्रथा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (एनईपी 2020) के उद्देश्य के खिलाफ है, जो सभी के लिए समान और सुलभ शिक्षा की बात करती है। साथ ही यह राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 (आरटीई अधिनियम, 2009) की धारा 29 का उल्लंघन भी है।
शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि कई किताबें और वर्कबुक्स अनिवार्य करने से नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 का भी उल्लंघन होता है, जिसमें स्कूल बैग का वजन और अतिरिक्त किताबों पर नियंत्रण की बात कही गई है। इन आरोपों को गंभीर मानते हुए एनएचआरसी ने कहा कि अगर ये सही हैं तो पहली नजर में आरटीई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एनएचआरसी ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस भेजा है। उनसे कहा गया है कि वे इन मामलों की जांच करें और कार्रवाई रिपोर्ट जमा करें।
एनएचआरसी ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या राज्य सरकारों ने जिला स्तर पर आरटीई अधिनियम की धारा 29 का पालन कराने के लिए कोई निर्देश जारी किए हैं या नहीं। अगर नहीं तो ऐसे आदेश जारी किए जाएं, ताकि प्राथमिक स्तर पर केवल एनसीईआरटी/एससीईआरटी की किताबें ही लागू हों।
राज्यों से यह भी पूछा गया है कि सरकारी और निजी स्कूलों में कितने छात्र पढ़ रहे हैं? 2025-26 सत्र के लिए कौन-कौन सी किताबें खरीदी गई हैं और नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए क्या कोई निरीक्षण या ऑडिट किया गया है या नहीं?
जहां ऑडिट नहीं हुआ है, वहां एनएचआरसी ने 30 दिनों के भीतर स्कूल-वार जांच करने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 को सख्ती से लागू करने के लिए भी कहा है। साथ ही शिक्षा मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आरटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एनसीईआरटी और एससीईआरटी जैसी संस्थाओं की पाठ्यक्रम और किताबें तय करने में क्या भूमिका है।
यह भी पूछा गया है कि क्या परीक्षा बोर्डों को प्राथमिक स्तर पर किताबें तय करने का अधिकार है या नहीं। एनएचआरसी ने निर्देश दिया है कि सभी विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तय समय के भीतर जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा की जाएं।
--आईएएनएस
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