हर थकाऊ सप्ताह बुरा नहीं होता। कभी-कभी ऐसा समय आता है जब कोई विशेष संकट या समस्या आपको परेशान नहीं करती, फिर भी आपका शरीर उस चुप्पी में थकावट महसूस करता है। यह स्थिति न तो बर्नआउट का संकेत है और न ही यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। मनोवैज्ञानिक और काउंसलर, श्रीमती अर्पिता कोहली, एक सरल तकनीक साझा करती हैं जो आपको इस स्थिति से उबरने में मदद कर सकती है।
कई बार, आपको अपने शरीर से थकान और बेचैनी को बाहर निकालने की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत एक सचेत श्वास से होती है। श्रीमती कोहली बताती हैं: "एक सरल और प्रभावी 10-मिनट की तकनीक है 'फिजियोलॉजिकल साईग और ग्राउंडिंग'। पहले, अपनी नाक से दो छोटी सांसें लें, फिर एक लंबी और धीमी सांस मुंह से छोड़ें। इसे 2 से 3 मिनट तक दोहराएं।" यदि आपने अभी तक इस विधि को नहीं आजमाया है, तो जान लें कि इरादे के साथ सांस लेना बहुत फर्क डालता है। यह तकनीक शरीर को शांत करने में मदद करती है।
स्वस्थ जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका है कि आपका शरीर, मन और आत्मा एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में हों। जब आप अपने शरीर को थका देते हैं और वह आराम करना भूल जाता है, तो इसका असर आपके मन पर भी पड़ता है। श्रीमती कोहली कहती हैं: "एक स्वस्थ मानसिक रीसेट का अनुभव शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर होता है।" यदि आप सही तरीके से रीसेट करते हैं, तो यह ध्यान केंद्रित करने, मूड में सुधार और निर्णय लेने में मदद करता है।