ऑपरेशन सिंदूर: L-70 गनों की गर्जना ने ड्रोन हमले रोके, सेना का साफ संदेश- 'भारत के खिलाफ हर वार...'
मयंक प्रताप सिंह April 23, 2026 06:12 AM

गुजरात की धरती पर ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी सिर्फ एक स्मरण नहीं, बल्कि एक जीवित गाथा बनकर सामने आई. साहस, सटीकता और अटूट संकल्प की गाथा. भारतीय सेना की एयर डिफेंस रेजिमेंट ने L-70 गनों के साथ उस क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसने एक साल पहले दुश्मन के ड्रोन हमलों को हवा में ही खत्म कर दिया था. ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर भारतीय सेना ने गुजरात में अपनी एयर डिफेंस ताकत का खुला प्रदर्शन किया. L-70 एयर डिफेंस गन, जो पिछले साल दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने में अहम साबित हुई थीं, एक बार फिर केंद्र में रहीं.

यह वही ऑपरेशन था, जिसने भारत की सैन्य सोच को निर्णायक रूप से बदल दिया. पहलगाम में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद देश ने इंतजार नहीं किया. 15 दिनों के भीतर सीमा पार आतंकी ढांचे पर सटीक और संगठित प्रहार हुआ. यह जवाब सिर्फ बदले का नहीं, बल्कि नीति का ऐलान था. L-70 गन सिर्फ हथियार नहीं, उस रात की कहानी हैं जब आसमान से आने वाले हर खतरे को जवानों ने अपनी सटीकता से रोक दिया. इसके साथ ही एडवांस ड्रोन, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और सर्विलांस सिस्टम ने युद्ध के नए आयाम तय किए, जहां हर मूवमेंट पर नजर और हर लक्ष्य पर त्वरित कार्रवाई संभव हुई.

जमीन ही नहीं, पानी पर भी वही प्रभुत्व दिखा. उथले क्रीक इलाकों में असॉल्ट बोट्स के जरिए तेज़ी से बढ़ते विशेष दस्ते. यह साफ संकेत था कि भारतीय सेना किसी भी भूगोल में लड़ाई की दिशा बदल सकती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यही रणनीति दुश्मन के हर प्रयास पर भारी पड़ी.

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति को नई दिशा दी
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति को नई दिशा दी. पाकिस्तान और PoJK में आतंकी ठिकानों पर की गई सटीक कार्रवाई ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों की क्षमता को बड़ा झटका दिया था. इस बरसी पर सेना ने अपने संकल्प को शब्दों में नहीं, शक्ति के प्रदर्शन में दोहराया. एडीजी पीआई का संदेश साफ था, “भारत के खिलाफ हर कार्रवाई का जवाब तय है. न्याय होगा हर बार.”

इस बार सेना ने सिर्फ गन पावर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का भी दम दिखाया. एडवांस ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम और रियल-टाइम इंटेलिजेंस जुटाने की क्षमता को मैदान में उतारा गया. चुनौतीपूर्ण इलाकों में लक्ष्य पहचान और त्वरित कार्रवाई की यह क्षमता ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी ताकत रही थी.

भारत कभी आतंक के आगे नहीं झुकेगा- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उस दर्द और संकल्प को याद किया, जिसने इस ऑपरेशन को जन्म दिया. उन्होंने कहा कि हम एक राष्ट्र के रूप में दुख और संकल्प में एकजुट हैं. भारत कभी आतंक के आगे नहीं झुकेगा. आतंकियों की नापाक साजिशें कभी सफल नहीं होंगी.

दुश्मन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब
पहलगाम का हमला एक घाव था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर उसका जवाब. एक ऐसा जवाब जिसने यह स्थापित कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि पहल करता है. दुश्मन ने जवाबी हमलों की कोशिश की. ड्रोन, गोलाबारी, सीमापार उकसावे लेकिन हर बार भारतीय सेना ने सटीक प्रहार से जवाब दिया. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले और गोलाबारी भी हुई, लेकिन भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में लाहौर और गुजरांवाला के पास अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. चार दिन तक चली तनातनी के बाद 10 मई को सीजफायर हुआ था.

एक साल बाद ऑपरेशन सिंदूर एक सैन्य कार्रवाई से कहीं आगे बढ़ चुका है. ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. यह भारतीय सेना की उस परंपरा का विस्तार है, जहां वीरता केवल युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि हर निर्णय में दिखती है. यह गाथा बताती है जब देश की बात आती है, तो भारतीय सेना सिर्फ रक्षा नहीं करती, इतिहास लिखती है.

 

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