रन और क्रीक में पाकिस्तान के लिए बुरी खबर? इंडियन आर्मी ने शुरू कर दी बड़ी तैयारी, शहबाज और मुनीर नहीं कर पाएंगे मुकाबला
आईएएनएस April 23, 2026 06:12 AM

ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है. पाकिस्तान की साजिशों को भारतीय सेना ने लद्दाख से लेकर गुजरात के भुज इलाके तक जमींदोज कर दिया. ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है और तैयारियों को पिछले एक साल से लगातार धार दी जा रही है. इसी कड़ी में गुजरात के सबसे विषम इलाकों- क्रीक और रन- में भी सेना रोज पसीना बहा रही है. भारतीय सेना क्रीक के 96 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में अपनी हाई-स्पीड बोट के जरिए निगरानी को लगातार मजबूत बनाए हुए है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यही स्थिति रही और पिछले एक साल में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है. क्रीक का पूरा इलाका सेना की 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड के अधीन आता है. ब्रिगेड कमांड ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठाए गए कदमों का खुलासा किया. ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने बताया कि शुरुआती चरणों में उन्होंने तेजी से सेना की तैनाती कर सुरक्षा सुनिश्चित की. साथ ही, उन्होंने संतुलित और सुदृढ़ तैनाती बनाए रखी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी आक्रामक ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सके.

ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने यह भी बताया कि 7 से 12 मई के बीच पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए हमारे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की. इसका जवाब भारतीय सेना ने सभी एजेंसियों के साथ मिलकर मुंहतोड़ तरीके से दिया. एक मजबूत और बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया, जिसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, आर्मी एयर डिफेंस के दस्ते और इंटीग्रेटेड सर्विलांस टीमें शामिल थीं. इन सभी ने मिलकर दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर दिया और रन-क्रीक जैसे संवेदनशील इलाके में होम ऑपरेशन कंट्रोल स्थापित करने में भी मदद की.

अगर 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड की बात करें तो यह देश की एक अनोखी फॉर्मेशन है, जिसमें इंफैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और आर्मी इंजीनियर्स एक साथ शामिल हैं. पैंगोंग झील में पेट्रोलिंग करने वाली आर्मी की हाई-स्पीड पेट्रोल बोट क्रीक इलाके में भी तैनात हैं. इनका मुख्य कार्य बीएसएफ और कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर क्रीक क्षेत्र में पेट्रोलिंग करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

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यह भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा है और यहां विवाद भी पुराना है, इसलिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स शांतिकाल में निगरानी करती है, जबकि भारतीय सेना दूसरी परत (सेकेंड लेयर) के रूप में तैनात रहती है. युद्ध के समय सेना बीएसएफ उसके साथ मिलकर नेतृत्व संभालती है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरता और सूझबूझ के लिए कई सैनिकों को सम्मानित भी किया गया. एक सैनिक ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी ड्रोन को न केवल ट्रैक किया, बल्कि उन्हें मार गिराया. भारतीय सेना की एयर डिफेंस गन एल-70 ने पाकिस्तान की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया. पाकिस्तान की ओर से इस इलाके में लगभग 100 ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिन्हें विफल कर दिया गया.

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अगर पूरे पश्चिमी सीमा की बात करें तो भारतीय सेना के एयर डिफेंस गन और मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के 600 से अधिक ड्रोन मार गिराए, जिसमें एल-70 की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कच्छ क्षेत्र में तैनात एयर डिफेंस यूनिट के कमांडिंग अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिट ने तेजी से कार्रवाई की और तुरंत सक्रिय हो गई.

राजस्थान और कच्छ सेक्टर में सेना और महत्वपूर्ण नागरिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई. 7 मई तक सभी एयर डिफेंस सिस्टम और टुकड़ियां पूरी तरह ऑपरेशनल तैनाती में आ चुकी थीं. अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के ड्रोन को लगातार मार गिराया गया और पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं हुआ. पाकिस्तान को उसकी गुस्ताखी का सबक सिखाने के लिए भारतीय टैंक और तोपों को भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था. रन के इलाके में आवश्यकता पड़ने पर ऐसा जवाब दिया जाता कि दुश्मन उसे कभी भूल नहीं पाता.

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