नए भारत के स्टार्टअप्स को बड़ी रफ्तार! सरकार ने खोली खजाने की दूसरी तिजोरी, जानें किसे और कैसे मिलेगा फायदा
TV9 Bharatvarsh April 26, 2026 11:42 AM

सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ‘फंड ऑफ फंड्स’ (FoF) योजना की दूसरी किस्त को लागू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बताया कि इन गाइडलाइंस में फंड के इस्तेमाल, गवर्नेंस और मॉनिटरिंग के तरीके शामिल हैं, जिनका मकसद भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पूंजी के प्रवाह की कुशलता को बेहतर बनाना है. इस योजना को SEBI में रजिस्टर्ड कैटेगरी I और II के ‘अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स’ (AIFs) को कमिटमेंट देकर लागू किया जाएगा. ये फंड DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे.

SIDBI की होगी जिम्मेदारी

मंत्रालय ने कहा कि इस तरीके से पूंजी का अनुशासित आवंटन सुनिश्चित होने, निजी निवेश को बढ़ावा मिलने और अलग-अलग सेक्टर्स, फेजों और भौगोलिक क्षेत्रों में फंडिंग तक व्यापक पहुंच बनने की उम्मीद है. मंत्रालय ने बताया कि ‘भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक’ (SIDBI) शुरुआती ‘कार्यान्वयन एजेंसी’ के तौर पर काम करेगा और AIFs के चयन और मॉनिटरिंग की एक व्यवस्थित प्रक्रिया के ज़रिए इस योजना को लागू करेगा. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग’ (DPIIT) भी एक अतिरिक्त कार्यान्वयन एजेंसी को अपने साथ जोड़ेगा, ताकि योजना की पहुंच का विस्तार किया जा सके, सेक्टर-विशेष की विशेषज्ञता को बढ़ाया जा सके और ऐसी योजनाओं के प्रबंधन के लिए संस्थागत क्षमताएं विकसित की जा सकें.

बांटी कई है कैटेगिरी

मंत्रालय ने कहा कि इकोसिस्टम में मौजूद कुछ खास कमियों को दूर करने के लिए, इन ऑपरेशनल गाइडलाइंस में AIFs का एक व्यवस्थित वर्गीकरण किया गया है. इसके तहत, AIFs को ‘डीप टेक’ पर केंद्रित फंड्स, शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को मदद देने वाले ‘माइक्रो वेंचर कैपिटल फंड्स’, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी-आधारित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों पर केंद्रित फंड्स, और किसी खास सेक्टर या चरण तक सीमित न रहने वाले (सेक्टर-अज्ञेय) फंड्स में बांटा गया है.

किन बातों का रखा जाएगा ध्यान?

एग्जीक्यूशन एजेंसी शुरुआती जांच-पड़ताल और ‘ड्यू डिलिजेंस’ (गहन समीक्षा) का काम करेगी. इसके बाद, एक ‘वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी’ प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी. यह कमेटी, टीम के पिछले रिकॉर्ड, फंड प्रबंधन की क्षमता और निवेश की रणनीति के आधार पर प्रस्तावों को परखेगी. इस कमेटी में उद्योग जगत, शिक्षा जगत और इनोवेशन इकोसिस्टम के जाने-माने दिग्गज शामिल हैं. इनमें वल्लभ भंसाली, अशोक झुनझुनवाला, रेणु स्वरूप, चिंतन वैष्णव और राजेश गोपीनाथन के साथ-साथ कार्यान्वयन एजेंसी के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.

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