108 एंबुलेंस में मरीज से हो गई उल्टी, स्टाफ ने परिजनों को थमाया झाड़ू-पोछा, करवाई सफाई… कटनी में मानवता शर्मसार
TV9 Bharatvarsh April 26, 2026 02:42 PM

Katni News: महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और बराबरी के दावे अक्सर बड़े-बड़े भाषणों और सरकारी विज्ञापनों तक ही सीमित नजर आते हैं. मध्य प्रदेश के कटनी जिले से सामने आई एक हृदयविदारक वीडियो ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है. यहां स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया, बल्कि मानवता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला जिला अस्पताल कटनी का है, जहां 108 एम्बुलेंस एक मरीज को लेकर पहुंची थी. जानकारी के मुताबिक, रास्ते में मरीज की तबीयत बिगड़ने के कारण उसे एम्बुलेंस के अंदर ही उल्टी हो गई, जिससे वाहन के भीतर गंदगी फैल गई. कायदे से एम्बुलेंस की सफाई और सैनिटेशन की जिम्मेदारी उसके स्टाफ या संबंधित सफाईकर्मियों की होती है. लेकिन, यहां जो हुआ वह रूह कंपा देने वाला है.

अस्पताल पहुंचने के बाद आरोप है कि एम्बुलेंस स्टाफ ने संवेदनशीलता की सभी हदें पार करते हुए मरीज के साथ आईं महिला परिजनों को ही झाड़ू और पोछा थमा दिया. मजबूर और परेशान परिजनों से ही एम्बुलेंस के अंदर की गंदगी साफ करवाई गई.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस शर्मनाक घटना का किसी ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सिस्टम के रक्षक कहे जाने वाले लोग एक बेबस परिवार की मजबूरी का तमाशा देख रहे हैं और महिलाओं से सफाई करवा रहे हैं. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और एम्बुलेंस सेवा की नैतिकता को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

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दबाव में आया प्रशासन: जांच के आदेश

वीडियो वायरल होने और चौतरफा किरकिरी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है. कटनी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा ने कहा कि यद्यपि इस संबंध में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन वायरल वीडियो को गंभीरता से लिया गया है. उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित चालक और स्टाफ से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाए. उन्होंने आश्वासन दिया है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता दोबारा न दिखे.

सवाल सिस्टम की नियत पर

यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की क्रूरता का चेहरा है। सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ स्पष्टीकरण और चेतावनी से ऐसे हालात बदलेंगे? जब एक ओर देश महिलाओं के सशक्तिकरण का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की दहलीज पर उनसे इस तरह का व्यवहार किया जाना बेहद दुखद है.

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