देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने सोमवार (27 अप्रैल, 2026) को जजों को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले वकील की जमकर क्लास लगाई है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे वकीलों के लिए अपने दरवाजे नहीं खोल सकता है, जो अपने काले कोट का गलत इस्तेमाल करते हैं.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच उन वकीलों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ने से रोका गया. कुछ संशोधित योग्यता के मानदंड पूरे न करने की वजह से उन्हें चुनाव लड़ने से रोका गया, जिसे वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट को पता चला कि बार काउंसिल चुनाव की निगरानी के लिए कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी के खिलाफ इनमें से एक वकील ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किए हैं. कमेटी का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुधांशु धूलिया कर रहे हैं. कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए वकील की जमकर क्लास लगाई और किसी भी याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'याचिकाकर्ता ने जस्टिस सुधांशु धूलिया और अन्य पदाधिकारियों पर झूठे, निराधार और अपमानजनक आरोप लगाकर पोस्ट किए हैं. वह कोर्ट से किसी भी तरह राहत का हकदार नहीं है.' कोर्ट ने कहा कि ऐसे वकीलों के लिए वह अपने दरवाजे नहीं खोलेगा जो अपने काले कोट का गलत इस्तेमाल करते हैं. कोर्ट इस वकील के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार कर रहा है.
कोर्ट ने कहा, 'हमें उस वकील का फेसबुक या वेबसाइट दिखाओ और बताओ कि उसके खिलाफ क्यों अवमानना का मामला न चलाया जाए और क्यों उसको तत्काल गिरफ्तार न किया जाए. ये लोग खुद को बहुत चालाक समझते हैं. इन्हें लगता है कि ये कानून अपने हाथ में ले सकते हैं. दूसरे याचिकाकर्ताओं को भी दिखाइए. ये बहुत ओवरस्मार्ट बनते हैं, जैसे हमें पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है. उस वकील ने जस्टिस सुधांशु धूलिया के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल किया और झूठे और निंदनीय आरोप लगाए. जस्टिस सुधांशु धूलिया को हमने कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है. हम एक लाख रुपये जुर्माने के साथ मामला खारिज करते हैं.'
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कोर्ट से कहा कि वह वकील अब याचिका का हिस्सा नहीं हैं. वह केस से हट गए हैं, अब वह याचिकाकर्ता नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वकील के बयानों का हम समर्थन नहीं करते हैं, हम उनके साथ नहीं हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वकील मामले से इसलिए पीछे हट गया क्योंकि वह जानता है कि हमने उसको पकड़ लिया है.
एडवोकेट सिद्धार्थ आर गुप्ता और अन्य याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें राहत से वंचित न किया जाए और सभी को एक जैसा न माना जाए. सबको एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, कोर्ट वकीलों के तर्क से सहमत नहीं हुआ और उन्होंने किसी को भी राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग परिस्थितियों की वजह से वकीलों को बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है इसलिए मध्य प्रदेश बार एसोसिएशन चुनाव को अलग तरीके से देखने की कोई वजह नहीं है.
कोर्ट ने कहा, 'हमें राहत देने का कोई कारण नहीं दिख रहा है... हम उन लोगों को कोर्ट का दरवाजा खोलने की इजाजत नहीं दे सकते हैं, जो सिस्टम का गलत इस्तेमाल करते हैं. ये लग्जरी लिटिगेशन हैं.' इसके बाद कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं.