भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 28 अप्रैल को हुई कैबिनेट मीटिंग में कई बड़े फैसले किए। उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के लिए 26 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। कैबिनेट ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग की आगामी 5 वर्षों (2026-2031) की निर्माण व नवीनीकरण परियोजनाओं के लिए 26 हजार 311 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की।
इसके अलावा कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति राशि में ऐतिहासिक वृद्धि कर इसे 1,550 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया। कैबिनेट ने ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था के लिए लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और प्रदेश की 38 हजार 901 आंगनवाड़ियों के विद्युतीकरण के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए। कैबिनेट ने भोपाल और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृतियां भी दे दीं।
कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन की स्वीकृति दी है। इस स्वीकृति अनुसार अब हर साल कुल 100 नए विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इनमें 50 सीटें ग्रेजुएशन और 50 सीटें पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के विद्यार्थियों के लिए तय की गई हैं। इसके साथ ही, जो विद्यार्थी पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें उनके कोर्स की अवधि पूरी होने तक सहायता मिलती रहेगी। कैबिनेट ने छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली 1,550 रुपये की राशि को अब बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपये प्रति माह कर दी है। योजना का लाभ लेने के लिए यह जरूरी है कि विद्यार्थी पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो और उसके अभिभावकों की वार्षिक आय सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई आय सीमा के भीतर हो।
कैबिनेट ने शाजापुर जिले की लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से शाजापुर जिले की शाजापुर तहसील के 17 और उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 ग्राम, इस तरह कुल 24 ग्रामों के लिए 9 हजार 200 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना अंतर्गत लखुंदर नदी पर शाजापुर जिले में मक्सी के समीप पूर्व से ही निर्मित जलाशय से 24.37 मीट्रिक घन. मीटर जल का से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।
कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मार्गों के नवीनीकरण, कार्यालयों की स्थापना और मरम्मत, आवासों के अनुरक्षण सहित भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी विभिन्न योजनाओं की सोलहवें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए लगभग 26 हजार 311 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इसके अनुसार मुख्यालय कार्यालय स्थापना, मण्डल कार्यालय स्थापना, अनुरक्षण, मरम्मत-संधारण और संभागीय कार्यालय स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 6,180 करोड़ 57 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही केन्द्रीय सड़क अधोसंरचना निधि संबंधी योजनाओं के लिए 6 हजार 925 करोड़ रुपये, एफ-टाईप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास एवं गैर आवासीय भवनों का अनुरक्षण का कार्य संबंधी योजना के लिए 1 हजार 680 करोड़ रुपये और भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी योजना के लिए 6 हजार 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन के भुगतान के लिए 25 करोड़ 50 लाख रुपये और मुख्य जिला मार्गों, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण संबंधी योजना के लिए 5 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा शिक्षा के विस्तार तथा दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीजी सीट वृद्धि योजना के अंतर्गत भोपाल के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के लिए रेडियोथैरिपी विभाग की ओपीडी, लीनियक मशीन बंकर, बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और कैथलैब का निर्माण कार्य के लिए 14 करोड़ 8 लाख रुपये की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान करने के साथ 79 करोड़ 16 लाख रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की।
कैबिनेट ने रीवा के श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के लिए 164 करोड़ 49 लाख रुपये के स्थान पर 174 करोड़ 80 लाख रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। दूसरी ओर, कैबिनेट ने 38 हजार 901 आंगनवाड़ी भवनों में बाहय विद्युतीकरण संबंधी योजना की 16वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) की स्वीकृति एवं निरंतरता के लिए 80 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके अनुसार प्रदेश में संचालित 97,882 आंगनवाड़ी केन्द्रों में से 38,901 विभागीय आंगनवाड़ी भवनों में विदयुत व्यवस्था करवाई जाएगी। आंगनवाड़ी भवनों में बाहय विदयुतीकरण होने पर ट्यूबलाईट-बल्ब-पंखा-कूलर-स्मार्ट टीवी, वॉटर प्यूरीफायर जैसी चीजों का पूरा इस्तेमाल किया जा सकेगा। आंगनवाड़ी केन्द्र के बच्चे सुविधाजनक वातावरण में शिक्षा व अन्य सेवाएं ले सकेंगे।