संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का बड़ा फैसला लिया है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इसे तेल निर्यातक समूहों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण पहले ही वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में UAE का यह फैसला बाजार में और अस्थिरता ला सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, OPEC से बाहर होने के बाद UAE अब बिना किसी उत्पादन सीमा के तेल उत्पादन बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी।ALSO READ: कागज लाओ, डेथ सर्टिफिकेट लाओ, नियम पूरे करो, 19300 रुपए के लिए बहन के कंकाल को कब्र खोदकर लाया जीतू मुंडा
OPEC क्या है?OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) की स्थापना 1960 में इराक के बगदाद में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला थे। इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करना और तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है। UAE ने 1967 में इस संगठन की सदस्यता ली थी और करीब 50 साल से अधिक समय तक इसका हिस्सा रहा।
क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता से नाराजअमेरिका- ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका से UAE नाराज हो गया, क्योंकि 'अभी वह चीजों को सिर्फ ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ (यानी पूरी तरह से सही या गलत) नजरिए से देख रहा है। UAE ही वह देश था जिसे ईरान के हमलों का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ा. हाल के दिनों में, UAE के दूतों ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान ने किस तरह मिसाइलों और ड्रोन के जरिए उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
क्या कहा UAE ने UAE ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह निर्णय उसके 'राष्ट्रीय हितों' और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को ध्यान में रखकर लिया गया है। उसने कहा कि संगठन में रहते हुए उसने महत्वपूर्ण योगदान दिए, लेकिन अब समय आ गया है कि वह अपनी ऊर्जा नीति को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाए।
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OPEC के लिए बड़ा झटकाUAE, OPEC का लंबे समय से सदस्य रहा है और उसके बाहर निकलने से संगठन की एकजुटता कमजोर पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे तेल उत्पादन और कीमतों को नियंत्रित करने की OPEC की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने कहा कि यह निर्णय देश की वर्तमान और भविष्य की उत्पादन नीतियों की समीक्षा के बाद लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर किसी अन्य देश, यहां तक कि सऊदी अरब से भी चर्चा नहीं की गई। बताया जा रहा है कि UAE लंबे समय से उत्पादन बढ़ाना चाहता था, लेकिन OPEC और OPEC+ के कोटा नियम इसमें बाधा बन रहे थे।
भारत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायकशुरुआती संकेत बताते हैं कि इससे भारत को कच्चे तेल की अधिक उपलब्धता, कीमतों में नरमी और द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों में मजबूती का फायदा मिल सकता है। यूएई 1 मई से औपचारिक रूप से ओपेक की सदस्यता छोड़ देगा और उत्पादन कोटा व्यवस्था से अलग हो जाएगा। अगर यूएई ओपेक के कोटा सिस्टम से बाहर होकर तेल उत्पादन को बढ़ाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है. इससे भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम कम आयात लागत और बेहतर आपूर्ति पहुंच के रूप में सकारात्मक साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यूएई के ओपेक से बाहर निकलने से मध्यम अवधि में वैश्विक तेल आपूर्ति में लचीलापन बढ़ेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ सकती हैं। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार पहले से ही आपूर्ति बाधाओं के दबाव में हैं। माना जा रहा है कि दुनिया के प्रमुख कम लागत वाले उत्पादकों में शामिल यूएई के इस कदम से आपूर्ति में लचीलापन बढ़ेगा और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। Edited by : Sudhir Sharma