60 साल पुराना नाता टूटा! होर्मुज संकट के बीच UAE ने OPEC से बनाई दूरी, ग्लोबल मार्केट पर क्या होगा असर?
TV9 Bharatvarsh April 29, 2026 11:42 AM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता के बीच United Arab Emirates ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए OPEC और OPEC+ गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है. 1967 से चला आ रहा यह संबंध अब खत्म होने जा रहा है. इस फैसले को वैश्विक ऊर्जा राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में तेल की कीमतों और ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखाई दे सकता है.

मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां United Arab Emirates ने आधिकारिक तौर पर OPEC और OPEC+ गठबंधन से 1 मई 2026 से बाहर निकलने का फैसला किया है. यह निर्णय न केवल 60 साल पुराने रिश्ते के अंत का संकेत देता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा में भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.

UAE के ऊर्जा मंत्री Suhail Al Mazrouei ने इसे सॉवरेन और रणनीतिक फैसला बताते हुए कहा कि यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति और बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

1967 में बना था सदस्य

UAE, 1967 से OPEC का सदस्य रहा है और वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने में उसकी अहम भूमिका रही है. लेकिन हाल के वर्षों में ऊर्जा मांग के बदलते पैटर्न, नई टेक्नोलॉजी, और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने देश को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया.

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण अधिक लचीलापन हासिल करना बताया जा रहा है. OPEC+ के प्रोडक्शन कोटा से बाहर निकलकर UAE अब अपनी तेल उत्पादन क्षमता को स्वतंत्र रूप से बढ़ा सकेगा. यह कदम खासतौर पर Abu Dhabi National Oil Company की वैश्विक विस्तार रणनीति के अनुरूप है, जो खुद को एक बहुराष्ट्रीय ऊर्जा दिग्गज के रूप में स्थापित करना चाहता है.

ग्लोबल मार्केट पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि UAE का यह कदम OPEC+ की एकता के लिए चुनौती बन सकता है. ऊर्जा विशेषज्ञ Vandana Hari के अनुसार UAE का बाहर निकलना OPEC+ के भीतर मतभेदों को उजागर करता है और यह संकेत देता है कि बड़े उत्पादक देश अब अधिक स्वतंत्र नीति अपनाना चाहते हैं.

हालांकि UAE ने यह भी साफ किया है कि वह वैश्विक ऊर्जा सहयोग से पीछे नहीं हट रहा है. देश ने भरोसा दिलाया है कि वह अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर बाजार स्थिरता बनाए रखने में सहयोग करता रहेगा. ग्लोबल मार्केट पर इसके असर की बात करें तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. UAE द्वारा धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाने से सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है. वहीं, OPEC+ की पकड़ कमजोर होने से बाजार में अनिश्चितता भी बढ़ सकती है.

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