अब एक ही कंपनी का नहीं होगा एयरपोर्ट पर राज, सरकार ला रही है नया सिस्टम
TV9 Bharatvarsh April 29, 2026 11:42 AM

देश में एयरपोर्ट निजीकरण को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब किसी एक कंपनी का कई हवाई अड्डों पर कब्जा नहीं हो पाएगा. सरकार बोली प्रक्रिया में सीमा तय करने पर विचार कर रही है, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और एकाधिकार की आशंका कम हो. 11 एयरपोर्ट्स के प्रस्तावित निजीकरण के लिए नई नीति तैयार की जा रही है, जिसमें छोटे और बड़े एयरपोर्ट को जोड़कर विकास को संतुलित करने की भी योजना शामिल है.

भारत में एयरपोर्ट निजीकरण के अगले चरण में सरकार एक बड़ा नीतिगत बदलाव करने की तैयारी में है. प्रस्ताव है कि किसी एक कंपनी को सीमित संख्या में ही हवाई अड्डे दिए जाएं, ताकि सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनी रहे और बाजार एक ही खिलाड़ी के हाथ में केंद्रित न हो. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 एयरपोर्ट्स के निजीकरण के लिए बोली प्रक्रिया से पहले नियमों में बदलाव पर गंभीर चर्चा चल रही है. पिछली बार 2018 में जब निजीकरण हुआ था, तब ऐसी कोई सीमा नहीं थी और Adani Enterprises ने सभी छह एयरपोर्ट्स की बोली जीत ली थी. इस बार सरकार उसी स्थिति को दोहराने से बचना चाहती है.

प्रस्तावित मॉडल के तहत किसी भी कंपनी को अधिकतम दो ब्लॉक यानी चार एयरपोर्ट ही दिए जा सकते हैं. अगर वही कंपनी तीसरे ब्लॉक के लिए सबसे ऊंची बोली लगाती है, तो दूसरे नंबर की कंपनी को उस बोली की बराबरी करने का मौका दिया जाएगा. इस कदम का मकसद प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और नए खिलाड़ियों को मौका देना है. इस नीति पर NITI Aayog, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं. अंतिम मंजूरी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेज़ल कमेटी (PPPAC) देगी.

ये भी है प्लान

सरकार इस बार एक नया क्लस्टर मॉडल भी लागू करने जा रही है. इसके तहत बड़े और छोटे एयरपोर्ट्स को एक साथ पैकेज में दिया जाएगा, ताकि कम मुनाफे वाले एयरपोर्ट्स का भी विकास हो सके. उदाहरण के तौर पर वाराणसी को कुशीनगर और गया के साथ, अमृतसर को कांगड़ा के साथ जोड़ा जाएगा.

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं. अधिकारियों का मानना है कि अगर बोली पर सख्त सीमा लगाई गई, तो कंपनियां आक्रामक बोली लगाने से बच सकती हैं, जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व कम हो सकता है. एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञ कपिल कौल (CEO, CAPA India) का कहना है कि यह कदम लंबी अवधि में सेक्टर के लिए बेहतर साबित हो सकता है. इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, लेकिन सरकार को संतुलन बनाकर चलना होगा ताकि निवेशकों का उत्साह भी बना रहे.

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