नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIAL) के शुरू होने के बाद से यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या इससे GMR Airports के दिल्ली एयरपोर्ट के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा. हालांकि ब्रोकरेज JM फाइनेंशियल की ताजा रिपोर्ट इस डर को काफी हद तक खारिज करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 34 साल में दिल्ली एयरपोर्ट से केवल 1015% यात्री ही नोएडा एयरपोर्ट की ओर शिफ्ट हो सकते हैं.
घरेलू यात्रियों तक सीमित रहेगा असरविश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव मुख्य रूप से घरेलू उड़ानों में ही दिखेगा. यानी कम किराए और कम मुनाफे वाले यात्री नोएडा एयरपोर्ट की ओर जा सकते हैं, जबकि ज्यादा कमाई देने वाला इंटरनेशनल ट्रैफिक दिल्ली एयरपोर्ट पर ही बना रहेगा.
दिल्ली एयरपोर्ट की मजबूत कनेक्टिविटीइंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) की सबसे बड़ी ताकत उसकी कनेक्टिविटी है. मेट्रो, रेलवे और हाईवे से अच्छी तरह जुड़ा होने के कारण NCR के ज्यादातर लोग इसे ही प्राथमिकता देते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट का बेस मजबूत बना रहेगा और बड़े पैमाने पर ट्रैफिक शिफ्ट होने की संभावना कम है.
इंटरनेशनल ट्रैफिक से होती है असली कमाईएयरपोर्ट की कमाई का बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल यात्रियों से आता है, जैसे ड्यूटी-फ्री शॉपिंग और अन्य सेवाएं. रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल ट्रैफिक में गिरावट 4% से भी कम रहने की उम्मीद है, जिससे कुल रेवेन्यू पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.
NCR के भीतर भी दिल्ली आगेदिलचस्प बात यह है कि नोएडा के आसपास के कई इलाकों के लिए भी दिल्ली एयरपोर्ट ज्यादा नजदीक पड़ता है. गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में यात्रा समय के लिहाज से दिल्ली एयरपोर्ट अब भी बेहतर विकल्प बना हुआ है.
कार्गो बिजनेस पर सीमित असरकार्गो सेगमेंट में भी नोएडा एयरपोर्ट का असर सीमित रहने की संभावना है. शुरुआती सालों में केवल 6% तक कार्गो ट्रैफिक शिफ्ट हो सकता है, क्योंकि दिल्ली एयरपोर्ट की इंटरनेशनल कनेक्टिविटी ज्यादा मजबूत है.
भविष्य में पूरक भूमिका निभाएगा NIALविशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नोएडा एयरपोर्ट, दिल्ली एयरपोर्ट का प्रतिस्पर्धी कम और सहयोगी ज्यादा बन सकता है. जैसे-जैसे दिल्ली एयरपोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ेगा, नोएडा अतिरिक्त दबाव को संभालने में मदद करेगा.
कुल मिलाकर, नोएडा एयरपोर्ट के आने से प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ेगी, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट की मजबूत पकड़, बेहतर कनेक्टिविटी और इंटरनेशनल ट्रैफिक के कारण बड़े नुकसान की आशंका फिलहाल कम नजर आती है.