हिंदी सिनेमा की 'ट्रेजेडी क्वीन' के नाम से मशहूर मीना कुमारी की जिंदगी जितनी शानदार पर्दे पर दिखी, उतनी ही दर्दनाक उनकी असल जिंदगी रही. महज 38 साल की उम्र में 31 मार्च, 1972 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके संघर्ष और दर्द से भरी कहानी आज भी लोगों को भावुक कर देती है.
पिता ने अनाथालय के बाहर छोड़ा
1933 में महजबीन बानो के रूप में जन्मीं मीना कुमारी का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता. आर्थिक तंगी इतनी थी कि जन्म के वक्त उनके पिता उन्हें अनाथालय के बाहर छोड़ आए थे. हालांकि, बाद में उन्हें वापस ले लिया गया. बहुत कम उम्र में ही उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया और महज 9 साल की उम्र से अपने परिवार का सहारा बन गईं.
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फिल्ममेकर कमाल अमरोही से की निकाह
1950 और 60 के दशक तक आते-आते मीना कुमारी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी एक्टेसेस की लिस्ट में शामिल हो गईं. फिल्मों के साथ-साथ वो अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहीं. 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने से उम्र में काफी बड़े फिल्ममेकर कमाल अमरोही से 1952 में गुपचुप निकाह किया और कई महीनों तक इस बात को सबसे छिपाकर रखा. कमाल अमरोही पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे. जब उनकी शादी की बात सबको पता चली, तो उनके रिश्ते में दरार आने लगीं.

कमाल अमरोही ने मीरा कुमारी पर लगाई पाबंदियां
इंडिया टुडे के अनुसार, अमरोही ने मीना कुमारी पर कई पाबंदियां लगा दी थीं. उन्हें नई फिल्में साइन करने से रोका गया, मेकअप रूम में किसी के आने की मनाही थी और उन्हें शाम 6 बजे तक घर लौटने का सख्त निर्देश था. वो उस समय बॉलीवुड की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री थीं, लेकिन उन्हें शाम ढलने के बाद घर से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं थी.
अकेलेपन का शिका हुईं मीना कुमारी
रिश्ते में बढ़ती दूरियों के बाद मीना कुमारी अकेलेपन का शिकार हो गईं. एक डॉक्टर ने उन्हें नींद न आने की बीमारी (इन्सोम्निया) के इलाज के तौर पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ब्रांडी पीने की सलाह दी, लेकिन धीरे-धीरे ये उनकी आदत बन गई. हालत यहां तक पहुंच गए कि उन्हें लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो गई. डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि एक और ड्रिंक उनकी जान ले सकती है, लेकिन वो खुद को रोक नहीं सकीं. वो बांद्रा स्थित अपने घर में अकेली रहने लगीं. वो रात में उर्दू शायरी लिखतीं और हर सुबह सेट पर पहुंच जाती थीं.

शराब के नशे में धुत रहने लगीं मीना कुमारी
इसी बीच मीना कुमारी की फिल्म 'पाकीज़ा' पर फिर से काम शुरू हुआ. उनकी ये फिल्म करीब 14 साल से अधूरी पड़ी थी. ये फिल्म उनके और कमाल अमरोही के रिश्ते टूटने की वजह से रुकी हुई थी. 1969 में अमरोही ने उन्हें फिल्म पूरी करने के लिए मनाया. उस समय तक मीना कुमारी की तबीयत काफी खराब हो चुकी थी, लेकिन दोस्तों के कहने पर उन्होंने हिम्मत जुटाई और फिल्म पूरी की.
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1972 में दुनिया को कहा अलविदा
फरवरी 1972 में 'पाकीज़ा' रिलीज हुई. प्रीमियर के दौरान मीना कुमारी ने खुद को पर्दे पर देखा और भावुक हो उठीं. फिल्म रिलीज होने के महज तीन हफ्ते बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनके लिवर ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था. आखिरकार 31 मार्च, 1972 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. मीरा कुमार के निधन के दौरान कमाल अमरोही कहीं नजर नहीं आए और 1993 में उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया.