Tum Ho Naa – Ghar Ki Superstar Review In Hindi: टेलीविजन के ‘चॉकलेटी बॉय’ और अपनी एक्टिंग के लिए मशहूर एक्टर राजीव खंडेलवाल ने एक लंबे इंतजार के बाद छोटे पर्दे पर वापसी की है. ‘कहीं तो होगा’ के सुजल बनकर जो उन्होंने छाप छोड़ी थी, वो आज भी बरकरार है. लेकिन अब राजीव वापस आए हैं एक नए अवतार में, सोनी टीवी के नए चैट शो ‘तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ के साथ.
इस शो का शोर तो बहुत था, लेकिन क्या ये शो वाकई हमारी उम्मीदों पर खरा उतरता है? क्या राजीव का वो पुराना ‘चार्म’ आज भी दर्शकों को बांध पाएगा? आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
शो देखने की 5 वजहें राजीव खंडेलवाल का वही पुराना ‘क्रेज’
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राजीव जब स्क्रीन पर आते हैं, तब एक अलग ही किस्म का ठहराव महसूस होता है. वो चीखते-चिल्लाते नहीं हैं, बल्कि अपनी बातों से सामने वाले का दिल जीत लेते हैं. ‘तुम हो ना’ में भी उनकी वही सहजता और सौम्यता नजर आती है. जब वो किसी हाउसवाइफ से उसकी जिंदगी की कहानी पूछते हैं, तो लगता ही नहीं कि वो कोई टीवी शो होस्ट कर रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे घर का ही कोई सदस्य बैठकर सुख-दुख बांट रहा हो. राजीव की यही सादगी इस शो की सबसे बड़ी जान है.
आम महिलाओं को ‘सुपरस्टार’ बनाना
अक्सर टीवी शोज में सेलेब्रिटीज को ही पलकों पर बिठाया जाता है, लेकिन इस शो ने उस सोच को बदल दिया है. यहां एक हाउस वाइफ, जो सुबह से रात तक बिना छुट्टी के काम करती है, उसे ‘सुपरस्टार’ का टैग दिया गया है, शो का ये कॉन्सेप्ट काबिले-तारीफ है. समाज में जिस औरत के काम को ‘अरे ये तो घर पर ही रहती है’ कहकर छोटा समझा जाता है, उसे नेशनल टीवी पर इतना बड़ा मंच देना एक बड़ा कदम है.
इमोशनल कनेक्ट जो रुला भी दे और हंसा भी दे
शो के दौरान जब महिलाएं अपने संघर्ष की कहानियां सुनाती हैं, तो दर्शक खुद को उससे जोड़ पाते हैं. चाहे वो बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी ख्वाहिशें कुर्बान करना हो या ससुराल में अपनी जगह बनाना, ये सब बातें मिडिल क्लास घरों की कड़वी हकीकत हैं. राजीव इन भावनाओं को बहुत ही खूबसूरती से बाहर लाते हैं, जिससे शो केवल एक गेम शो न रहकर एक ‘इमोशनल सफर’ बन जाता है.
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बनावटी ड्रामे से कोसों दूर
आजकल के रियलिटी शोज में जबरदस्ती की कॉमेडी या स्क्रिप्टेड लड़ाइयां होती हैं. ‘तुम हो ना’ इस मामले में बहुत साफ-सुथरा है. यहां कोई शोर नहीं है, कोई नकली हंसी के फव्वारे नहीं हैं. जो है, वह बहुत सहज और असली है. यही वजह है कि ये शो पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है.
प्रोडक्शन और प्रेजेंटेशन
शो का सेट काफी शानदार है और इसे बहुत ही पॉजिटिव वाइब के साथ तैयार किया गया है. राजीव का लुक, उनका कोट पर लगा ब्रोच और उनकी स्टाइलिंग उन्हें एक मॉडर्न और सेंसिबल होस्ट के रूप में पेश करती है. शो को जिस तरह से एडिट किया गया है, वो आंखों को सुकून देता है.
अब बात करते हैं, शो से जुड़ी उन 5 बातों की जो खटकती हैं और उनपर काम करके उन्हें बेहतर बनाया जा सकता था.
1. रफ्तार में कमीआज के दौर में जब लोग 30 सेकंड की रील्स देख रहे हैं, वहां इस शो की रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस होती है. बातचीत कभी-कभी इतनी लंबी हो जाती है कि दर्शक बोरियत महसूस करने लगता है. शो को थोड़ा और ‘करिश्माई’ और ‘फास्ट’ बनाने की जरूरत है ताकि रिमोट पर अंगूठा न जाए.
2. रोमांच की कमीशो का नाम भले ही ‘तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ हो, लेकिन जो टास्क या गेम्स खिलाए जा रहे हैं, उनमें वो ‘थ्रिल’ गायब है. गेम देखते वक्त ऐसा नहीं लगता कि ‘अब क्या होगा?’ अगर टास्क थोड़े और क्रिएटिव और चैलेंजिंग होते, तो दर्शकों को शो के साथ बांधे रखना और भी आसान हो जाता. सिर्फ बातचीत से शो को लंबा खींचना मुश्किल होगा.
3. कॉम्पिटिशन की कमी
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रियलिटी शो का मतलब ही होता है मुकाबला. यहां कॉम्पिटिशन की वो आग नजर नहीं आती. सब कुछ बहुत ‘गुड-गुड’ लगता है. थोड़ा मुकाबला, थोड़ी रेस और थोड़ी होड़ हो, तो मजा दोगुना हो जाए. मेकर्स को चाहिए कि वो फॉर्मेट में कुछ ऐसा जोड़ें जिससे दर्शकों के बीच भी चर्चा हो कि ‘कौन जीतेगा?’
4. मास अपील का अभावराजीव खंडेलवाल का अपना एक खास दर्शक वर्ग है जो उन्हें पसंद करता है, लेकिन क्या ये शो छोटे शहरों के उन दर्शकों को खींच पाएगा जिन्हें ‘खतरों के खिलाड़ी’ या ‘बिग बॉस’ जैसे झटके या ‘अनुपमा’-‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ जैसे सास-बहू शो चाहिए? शो का मिजाज थोड़ा ज्यादा संजीदा है. इसमें मनोरंजन का वो तड़का कम है जो टीआरपी के मीटर को ऊपर ले जाता है.
5. फॉर्मेट का बार-बार दोहराया जानाअगर हर एपिसोड में वही फॉर्मेट रहा, बातचीत, एक छोटा गेम और फिर गिफ्ट्स तो ये जल्दी ही अपना असर खो सकता है. शो में बदलाव की सख्त जरूरत है. शायद सेलिब्रिटी गेस्ट्स या कुछ बाहरी टास्क इस कमी को पूरा कर सकें.
देखें या नहीं
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राजीव खंडेलवाल का नया शो एक ताजी हवा के झोंके जैसा है, लेकिन टीवी की दुनिया में टिके रहने के लिए सिर्फ अच्छी नीयत काफी नहीं होती, ‘एंटरटेनमेंट‘ भी चाहिए होता है. राजीव अपनी तरफ से 100% दे रहे हैं, पर शो के कंटेंट को और मसालेदार बनाने की जरूरत है.
अगर आप शोर-शराबे से दूर, अपनी मां-बहन के संघर्ष को सलाम करने वाला कोई शो देखना चाहते हैं, तो ये शो आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव होगा. इस शो को हम एक ईमानदार कोशिश कह सकते हैं, बस थोड़ी रफ़्तार की कमी है. लेकिन राजीव के उन फैंस के लिए ये शानदार अनुभव होगा, जो उन्हें छोटे परदे पर मिस कर रहे थे!