पहले सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता था, लेकिन अब समय बदल चुका है। अब शौक भी सुरक्षित निवेश की श्रेणी में शामिल हो गया है। अरबपति निवेशक तेजी से प्राचीन कला और एंटीक संपत्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हाल ही में, सायरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग को 167 करोड़ रुपये में खरीदकर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। यह लेन-देन दर्शाता है कि कला अब केवल भावनाओं का प्रतीक नहीं, बल्कि उच्च लाभ और कम जोखिम वाला निवेश बन गया है, जहां दुर्लभता, विरासत और वैश्विक मांग मिलकर कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं.
भारतीय कला बाजार में हाल के दिनों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सदियों पुरानी कला, जो पहले केवल संग्रहकर्ताओं के शौक का हिस्सा मानी जाती थी, अब अरबपतियों के लिए सुरक्षित निवेश बन रही है। इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब सायरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की पेंटिंग को 167.2 करोड़ रुपये में खरीदा, जो कि इसकी अनुमानित कीमत से काफी अधिक है.
यह प्रवृत्ति केवल एक लेन-देन तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष, क्रिस्टी की लंदन नीलामी में मुगलकालीन पेंटिंग 'A Family of Cheetahs' 120 करोड़ रुपये में बिकी, जबकि इसकी अनुमानित कीमत केवल 78.5 करोड़ रुपये थी। यह 14 गुना वृद्धि इस बात का संकेत है कि पुरानी कला अब कम मूल्यांकित नहीं रही। इसी तरह, 2025 में M. F. Husain की पेंटिंग 'Gram Yatra' ₹118 करोड़ में बिकी, जिसने आधुनिक भारतीय कला का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इन लेन-देन से स्पष्ट है कि भारतीय कला बाजार तेजी से पुनर्मूल्यांकन हो रहा है.
एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य कारण सीमितता है। पुराने आर्टवर्क की संख्या सीमित है और नए नहीं बनाए जा सकते। इसके अलावा, इनकी कीमतें शेयर बाजार से सीधे प्रभावित नहीं होतीं, जिससे बाजार में गिरावट का प्रभाव कम होता है। कला बाजार की विशेषज्ञ अनीता डालमिया का कहना है कि उच्च नेटवर्थ निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने के लिए कला को गंभीरता से ले रहे हैं। यह दीर्घकालिक धन संरक्षण का एक मजबूत साधन बन चुका है.
IIMA Aura Art Indian Art Index के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही में भारतीय कला में 35% वार्षिक रिटर्न दर्ज किया गया। वहीं, पिछले 5 वर्षों का CAGR लगभग 18% रहा है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कला केवल प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 1990 के दशक में M. F. Husain और 2000 के दशक में V. S. Gaitonde में निवेश करने वाले संग्रहकर्ता आज कई गुना रिटर्न कमा चुके हैं। यही कारण है कि अब निवेशक पुराने, दुर्लभ और ऐतिहासिक संपत्तियों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.