भारत में हाईवे यात्रा को आसान बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है. अब टोल प्लाजा पर लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होने वाली है. मुंबई–दिल्ली नेशनल हाईवे (NH48) पर सूरत के पास देश का पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा शुरू कर दिया गया है, जहां गाड़ियां बिना रुके ही निकल सकेंगी. यह नई टेक्नोलॉजी यात्रा को तेज और आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.
ये नया सिस्टम मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है. अब टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा और गाड़ी को रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जैसे ही आपकी गाड़ी टोल के नीचे से गुजरेगी, वैसे ही टोल अपने-आप कट जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होती है, जिसमें इंसान की जरूरत नहीं पड़ती.
दरअसल, इस सिस्टम में हाई-टेक कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं. ये कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को पढ़ते हैं, जिसे ANPR (Automatic Number Plate Recognition) टेक्नोलॉजी कहा जाता है. साथ ही FASTag के जरिए गाड़ी की जानकारी भी ली जाती है. इन दोनों के आधार पर टोल का पैसा सीधे आपके बैंक खाते से कट जाता है.
छोटी गाड़ियों जैसे कार, जीप और वैन के लिए टोल चार्ज सबसे कम होता है. आमतौर पर इस रूट पर इन गाड़ियों से लगभग 100 से 150 रुपये तक का टोल लिया जाता है. यह दूरी और हाईवे के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है, लेकिन यही सामान्य रेंज रहती है.
मध्यम और भारी वाहनों जैसे बस और ट्रक पर ज्यादा टोल लगता है. बसों के लिए यह करीब 300 से 500 रुपये तक हो सकता है, जबकि बड़े ट्रकों के लिए यह 500 रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. यह उनके साइज और एक्सल (पहियों) की संख्या पर निर्भर करता है.
जिन गाड़ियों में ज्यादा एक्सल होते हैं, जैसे बड़े कंटेनर ट्रक, उन पर सबसे ज्यादा टोल लगता है. ऐसे वाहनों के लिए यह शुल्क 600 से 1000 रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. यह पूरी तरह वाहन के आकार और वजन पर निर्भर करता है.
इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम कम होगा. जब गाड़ियों को रुकना ही नहीं पड़ेगा, तो ट्रैफिक अपने आप तेज चलेगा. इससे यात्रा का समय कम होगा और Fuel की भी बचत होगी. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक देशभर के 1000 से ज्यादा टोल प्लाजा को इस नए सिस्टम में बदल दिया जाए. इससे पूरे देश में टोल सिस्टम आधुनिक और तेज हो जाएगा. यह कदम लॉजिस्टिक्स और व्यापार के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि माल ढुलाई में समय की बचत होगी.
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