देहरादून, 2 मई: ग्रेट निकोबार परियोजना रणनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन रही है, जिसमें सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी.एस. रावत ने हाल ही में एक साक्षात्कार में इसके आर्थिक और रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस परियोजना के भौगोलिक संदर्भ को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया.
मेजर जनरल रावत ने बताया, “ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी भाग है और यह मलक्का जलडमरूमध्य के बहुत करीब स्थित है, जो लगभग 150 किलोमीटर दूर है, जबकि इंडोनेशिया और भी निकट है. यह भौगोलिक स्थिति भारत को मुख्यभूमि से लगभग 1400 से 1500 किलोमीटर तक समुद्री पहुंच प्रदान करती है, जिससे भारत को बंगाल की खाड़ी और Indian महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिलती है.”
उन्होंने वैश्विक व्यापार में मलक्का जलडमरूमध्य के महत्व को उजागर करते हुए कहा, “लगभग 30 से 40 प्रतिशत विश्व व्यापार इस मार्ग से गुजरता है. इसलिए, ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के लिए एक ‘अविनाशी सैन्य आधार’ के रूप में कार्य कर सकता है, जिससे समुद्री गतिविधियों की निगरानी और क्षेत्र में अन्य शक्तियों, विशेषकर चीन, की उपस्थिति का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.”
रावत ने मलक्का जलडमरूमध्य की रणनीतिक महत्वपूर्णता की तुलना होर्मुज जलडमरूमध्य से करते हुए कहा, “इन समुद्री चोकपॉइंट्स पर नियंत्रण या मजबूत उपस्थिति किसी भी राष्ट्र के लिए रणनीतिक लाभ का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.”
परियोजना के संचालनात्मक महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाएगी, जिससे समुद्री गतिविधियों का बेहतर ट्रैकिंग संभव होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सकेगी. हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने साबित किया है कि संकीर्ण समुद्री मार्गों का रणनीतिक उपयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है.”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा परियोजना के संबंध में उठाए गए प्रश्नों के जवाब में रावत ने संतुलित दृष्टिकोण की वकालत की. उन्होंने कहा, “जिम्मेदार नागरिकों और सैन्य अधिकारियों के रूप में, हमें विकास और पर्यावरण दोनों पहलुओं पर विचार करना चाहिए. भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है, और बड़े अवसंरचना परियोजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.”
जी.एस. रावत ने निष्कर्ष निकाला कि, आज की दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितताओं को देखते हुए, ग्रेट निकोबार जैसी परियोजनाओं को केवल विकास के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी देखना चाहिए. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूत करेगी.
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