सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को अधिकारी चुनने का अधिकार है। केंद्र या राज्य में से अधिकारी को चुना जा सकता है। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के सर्कुलर का पूरी तरह पालन होगा। इस मामले में किसी आदेश की जरूरत नहीं है।
जस्टिस नरसिम्हा, बागची की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए टीएमसी का पक्ष सुना। अदालत ने कहा कि काउंटिंग अधिकारी राज्य का हो या केंद्र का, इसका फैसला करना चुनाव आयोग का अधिकार है। हर सेंटर पर आपके एजेंट भी होंगे।
कपिल सिब्बल ने टीएमसी का पक्ष रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता। राज्य के अधिकारियों को भी चुना जाना चाहिए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि टीएमसी की आशंका ही गलत है। रिटर्निंग ऑफिसर राज्य का ही है और उसने ही अधिकारियों को चुना है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुक्रवार को चुनाव आयोग (EC) के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आयोग ने निर्देश दिया था कि मतगणना के दौरान केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को ही काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
TMC ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है और राज्य सरकार के कर्मचारियों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
हाईकोर्ट में भी नहीं मिली थी टीएमसी को राहतहाईकोर्ट से भी इस मामले में टीएमसी को राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसमें कोई अवैधता नहीं है।
गौरतलब है कि राज्य में 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में बंपर वोटिंग हुई थी। आज भी दक्षिण 24 परगना जिले में 15 बूथों पर पुनर्मतदान हो रहा है। 4 मई को मतगणना के बाद चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।
edited by : Nrapendra Gupta