देश के 5 राज्यों में मतगणना चल रही है. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आज (सोमवार) शाम तक आएंगे. कई कैंडिडेट ऐसे भी होंगे जो पहली बार विधायक बनेंगे और सदन में जनता की आवाज उठाएंगे. विधायकों को सैलरी के साथ कई सुविधाएं भी मिलती हैं. हर राज्य में विधायक की सैलरी अलग-अलग होती है क्योंकि इसे वहां राज्य सरकार तय करती है. इसके लिए भी बकायदा विधानसभा में विधेयक पेश करना होता है. इसके बाद ही सैलरी में बढ़ोतरी होती है. लेकिन सवाल है कि क्या चुनाव जीतते ही विधायकों की सैलरी पक्की हो जाती है?
नियम कहता है, विधायकों की सैलरी सिर्फ चुनाव जीतनेभर से पक्की नहीं होती. इसके आगे की प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है. विधानसभा चुनाव की सभी राउंड की मतगणना के बाद रिटर्निंग ऑफिसर विजेता का ऐलान करता है और तभी विजयी प्रत्याशी को प्रमाण पत्र दिया जाता है.
कब चलता है सैलरी का मीटर?कोई भी विधायक सैलरी का हकदार तब तक नहीं होता जब तक वो आधिकारिक तौर पर शपथ नहीं लेता और अपना पद नहीं संभालता. चुनाव परिणाम के बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया होती है. इसका हिस्सा होने के बाद भी वो आधिकारिक तौर पर विधायक कहलाते हैं. शपथ की तारीख के साथ उनकी सैलरी और भत्तों की शुरुआत हो जाती है.
बंगाल हो या असम, कहां-कितनी है MLA की सैलरी?हर राज्य सरकार विधायकों के वेतन और भत्ते स्वयं निर्धारित करती है. राज्य के वेतन और भत्ते अधिनियम में संशोधन के माध्यम से महंगाई को ध्यान में रखते हुए वेतन में नियमित रूप से वृद्धि की जाती है. अधिकतर मामलों में, वेतन वृद्धि की सिफारिश एक समिति द्वारा की जाती है. अपने मूल वेतन के अलावा, विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए काम, सहायक नियुक्त करने और टेलीफोन बिलों के लिए भी भत्ते मिलते हैं. विधायक सरकारी आवास, देश भर में मुफ्त यात्रा, चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच और वाहन खरीदने के लिए ऋण सहित कई सुविधाओं का लाभ भी उठा सकते हैं.
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