पश्चिम बंगाल का राजनीतिक नक्शा बदलने वाली ममता बनर्जी ने न सिर्फ 15 वर्षों के अपने शासन वाले राज्य में सत्ता गंवा दी है, बल्कि उन्हें अपने राजनीतिक गढ़ भवानीपुर में भी करारी शिकस्त मिली. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), सरकार और विचारधारा को एक ही धुरी पर लाने वाली पार्टी प्रमुख के लिए बंगाल में जनता का फैसला केवल चुनावी नहीं है, बल्कि अस्तित्व का सवाल बन गया है.
बीजेपी ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है, जबकि राजनीतिक रूप से उसे ममता बनर्जी के गृह क्षेत्र भवानीपुर सीट पर हार से भी बड़ा झटका लगा है, जहां बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया.
नंदीग्राम सीट पर हार की यादें की ताजाभवानीपुर की हार ने पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की नंदीग्राम सीट पर हार की यादें ताजा कर दीं, जहां शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें हराया था. साल 2021 में, ममता बनर्जी (71) नंदीग्राम सीट हार गई थीं लेकिन बंगाल में शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि 2026 में वह अपनी सीट भी हार गईं और उन्हें बीजेपी के हाथों सत्ता भी गवानी पड़ी.
संगठनात्मक अस्तित्व की चुनौतीममता बनर्जी के लिए अब चुनौती सिर्फ चुनावी वापसी की नहीं, बल्कि संगठनात्मक अस्तित्व की भी है. उनके लिए परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं. 71 साल की उम्र में, तीन कार्यकाल पूरे करने के बाद, वापसी का रास्ता उनके करियर के किसी भी पिछले पड़ाव से कहीं अधिक कठिन लगता है. फिर भी, दीदी के नाम से मशहूर ममता बनर्जी की राजनीति का इतिहास प्रतिरोध से ही फलता-फूलता रहा है.
सत्ता से बेदखल होने पर, ममता बनर्जी उसी शैली में लौटने का प्रयास कर सकती हैं, जिसमें टीएमसी को विपक्षी ताकत में परिवर्तित करना, और इसकी राजनीतिक शक्ति को फिर से हासिल करना शामिल है.
सत्ता विरोधी लहर का संकेतबता दें कि काउंटिंग के दौरान भवानीपुर मतगणना केंद्र पर ममता बनर्जी के निकलते ही तनाव साफ महसूस हो रहा था. वहां बीजेपी समर्थकों की भीड़ ने उनका स्वागत किया और ‘घोटालाबाज ममता दूर हटो’ के नारे लगाए, जो टीएमसी के 15 साल के शासन के बाद सत्ता विरोधी लहर का संकेत था.
206 सीटें जीतकर हासिल किया बहुमतबीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया और टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया. बंगाल में बहुमत का आंकड़ा 148 है. हालांकि, फालता में मतदान रद्द होने के कारण 293 निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती हुई और इस वजह से फिलहाल बहुमत का आंकड़ा 147 है.
बीजेपी ने बढ़ाया अपना जनाधारपश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सत्तारूढ़ टीएमसी के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाई और शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाया. इस जीत के साथ, बीजेपी राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने 206 सीटें जीत लीं हैं जबकि टीएमसी ने 78 सीट पर जीत दर्ज की है और 3 सीट पर बढ़त बनाये हुए है.
साल 2011 में लगभग चार प्रतिशत के मामूली वोट शेयर से, बीजेपी 2019 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई और फिर 2021 के विधानसभा चुनावों में 77 सीटें हासिल करके वामपंथी और कांग्रेस को पछाड़ते हुए टीएमसी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी.