जब गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान अनिल विश्वास ने तलत महमूद को लगाई थी डांट, ‘कंपन’ बन गई पहचान
आईएएनएस May 10, 2026 05:42 AM

मखमली आवाज के जादूगर, जिसकी गायकी में दर्द, उदासी और तन्हाई की गहराई समाई हुई थी, बात हो रही है अभिनेता और गायक तलत महमूद की, जिनकी आवाज आज भी लाखों दिलों को छूती है. कम लोग जानते हैं कि उनकी आवाज की सबसे बड़ी खासियत यानी 'कंपन' (लर्जिश) थी. इससे जुड़ा एक मजेदार किस्सा है, जो उनकी पहचान की वजह बना. गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान संगीतकार अनिल विश्वास ने जब उन्हें जोर से डांटा, तो उसी पल तलत महमूद को अपनी आवाज पर भरोसा हुआ और यही 'कंपन' बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.

पहली डिस्क से हुए मशहूर
तलत महमूद का जन्म लखनऊ में हुआ था. उनके पिता मंजूर अहमद थे. बहुत कम उम्र में उन्होंने पंडित एससीआर. भट्ट से शास्त्रीय और सुगम संगीत की शिक्षा ली. 1939 में उन्होंने आकाशवाणी लखनऊ केंद्र से अपना करियर शुरू किया. उन्होंने वहां दाग, मीर, गालिब और फैज अहमद फैज जैसे शायरों की गजलें गाईं. इसके बाद वह कोलकाता चले गए, जहां एचएमवी के लिए 'तपन कुमार' नाम से गाने रिकॉर्ड करवाए. 1941 में उनकी पहली डिस्क 'सब दिन एक समान नहीं था' आई, जिसने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया.

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साल 1949 में तलत महमूद मुंबई आए. यहां उनका सामना बेमिसाल संगीतकार अनिल विश्वास से हुआ. अनिल विश्वास को उनकी आवाज पसंद आई और फिल्म 'आरजू' में उनका पहला गाना 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' रिलीज हुआ. इसी गाने से उनकी फिल्मी यात्रा शुरू हुई.

गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान अनिल विश्वास ने तलत महमूद को लगाई थी डांट
एक गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान तलत महमूद अपनी आवाज की प्राकृतिक लर्जिश (कंपन) पर शर्मिंदा थे. वे पूरी तरह सपाट स्वर में गा रहे थे. इस दौरान वह काफी नर्वस भी थे, पास ही खड़े अनिल विश्वास यह काफी देर से देख रहे थे, ऐसे में अनिल विश्वास ने उन्हें जोर से डांटते हुए समझाया कि तुम्हारी आवाज की यही कंपन तुम्हारी सबसे बड़ी खासियत है. अनिल विश्वास के इस प्रोत्साहन और डांट ने तलत को नया आत्मविश्वास दिया. उन्होंने फिर से गाया और उसी दिन से उनकी आवाज की यह कंपन उनकी पहचान बन गई. यह घटना तलत महमूद के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई.

इसके बाद तलत महमूद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने सलिल चौधरी, मदन मोहन, नौशाद, शंकर-जयकिशन, सी. रामचंद्र और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों के साथ काम किया. दिलीप कुमार, सुनील दत्त जैसे अभिनेताओं पर उनकी आवाज बेमिसाल रही.

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फिल्मों में भी किया काम
तलत महमूद शानदार गायक के साथ ही अभिनेता भी थे, उन्होंने फिल्मों में अभिनय भी किया. फिल्म 'सोने की चिड़िया' में वह हीरो बने थे. उन्होंने गैर-फिल्मी गजलों और गीतों के एल्बम भी जारी किए और दुनिया भर में संगीत कार्यक्रम किए. अपने पूरे करियर में उन्होंने लगभग 800 गाने गाए. 9 मई 1998 को तलत महमूद का निधन हो गया.

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