तमिलनाडु भाजपा में हलचल: अन्नामलाई का नया राजनीतिक आंदोलन और इस्तीफों की लहर
newzfatafat June 06, 2026 01:42 AM

चेन्नई: तमिलनाडु में भाजपा के भीतर राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। पार्टी के कई प्रमुख नेताओं के इस्तीफे ने राज्य इकाई में असंतोष और खींचतान को उजागर किया है। हाल ही में, भाजपा की राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष करू नागराजन ने भी पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। इन घटनाओं के बाद, राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।


राजनीतिक चर्चाओं का बढ़ता दौर

इन इस्तीफों से पहले, भाजपा की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी संगठन से अलग होने का निर्णय लिया था। उनके इस्तीफे के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि राज्य भाजपा के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं। खबरें हैं कि करू नागराजन जल्द ही अन्नामलाई से मुलाकात कर सकते हैं, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।


अन्नामलाई ने अपने निर्णय के बारे में कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनता के बीच रहकर काम करना रही है। उनका मानना है कि भाजपा को तमिलनाडु में अपने बलबूते चुनाव लड़ने चाहिए और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि जनता के साथ सीधे जुड़कर एक नई दिशा में काम करना चाहते हैं।


नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत

इसी उद्देश्य से अन्नामलाई ने एक नए राजनीतिक जनआंदोलन की शुरुआत की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से 'अन्नामलाई मक्कल इयक्कम' (AMI) नामक पहल की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, इस अभियान को प्रारंभिक दौर में ही लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।


अन्नामलाई ने बताया कि अब तक तीन हजार से अधिक स्वयंसेवक इस नए आंदोलन से जुड़ने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी टीम आने वाले दिनों में सभी स्वयंसेवकों से संपर्क करेगी और संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। भाजपा से अलग होकर जनआंदोलन शुरू करने का उनका फैसला यह संकेत देता है कि वे राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने और एक अलग जनाधार तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके इस नए अभियान का तमिलनाडु की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।


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