भारत ने बारह साल पहले एक ऐसी सरकार देखी थी जो मानव गरिमा को महत्व देती थी। लेकिन 2014 के बाद से स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने 125-130 करोड़ लोगों को मुफ्तखोर और परजीवी बनाने का एक बड़ा अभियान शुरू किया। एक रात अचानक नोटबंदी का ऐलान हुआ, जिससे लोग बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हो गए। अब अनपढ़ और गरीब लोग भी डिजिटल लेनदेन के माध्यम से लाभार्थी बन गए हैं। सोचिए, आज 145 करोड़ की जनसंख्या में कितने लोग परजीवी जीवन जी रहे हैं। सरकार द्वारा लोगों के खातों में छोटी-छोटी राशियाँ डालने से एक नई परजीवी संस्कृति का जन्म हुआ है।
दुनिया अब भारत को एक नए रूप में देख रही है। हाल ही में थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भारतीय पर्यटकों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिला है। वीडियो में भारतीयों की उछलकूद को देखकर ऐसा लगता है जैसे वे एक नई प्रजाति के जीव हैं।
भारत की पहचान अब कॉकरोच के रूप में बन गई है। युवा जो फर्जी डिग्रियों के सहारे सक्रिय हैं, वे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को प्रभावित कर रहे हैं। 2014 से पहले भारत में लोग कामकाजी थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
कॉकरोच की परजीविता का अर्थ है कि वे कोई उपयोगी काम नहीं करते, लेकिन मुफ्त में जीवन यापन करते हैं। यदि यही कसौटी है, तो मोदी सरकार ने पिछले बारह वर्षों में देश की ऐसी ही छवि बनाई है। भारत की जनसंख्या में 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों की संख्या आधी है, और हर साल लाखों स्नातक डिग्री प्राप्त करते हैं। लेकिन इनमें से कितनों को नियमित नौकरी मिलती है?
बारह साल पहले का भारत एक मेहनती युवा वर्ग का देश था, जो पढ़ाई और करियर में विश्वास रखता था। आज भारत की पहचान कॉकरोच के रूप में बन गई है। मोदी सरकार अब इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयासरत है।