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इस बीच बैठक को लेकर एनडीए नेताओं ने तंज कसा है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि इन लोगों की आपस में स्वार्थ की राजनीति है। जहां स्वार्थ है, वहां सिर फुटव्वल तय है। एनडीए पूरे देश में एकजुट है, बिहार में एकजुट है।
भाजपा नेताओं ने विपक्षी गठबंधन की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन आने वाले दिनों में धीरे-धीरे बिखर जाएगा। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन में जब तक राहुल गांधी रहेंगे तब तक कभी सफल नहीं हो सकता है।
इसलिए विपक्ष के नेताओं को सोचने का वक्त आ गया है कि राहुल गांधी के साथ रहना है या अपने नाव को बचाना है। इंडिया गठबंधन की यह बैठक हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी रणनीति तय करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन बैठक से पहले सामने आए मतभेदों ने विपक्षी एकता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी कोलकाता से दिल्ली आने वाले हैं, मगर इस बार कांग्रेस पार्टी का एक पुराना सहयोगी दल डीएमके इसमें शामिल नहीं होगा। दरअसल, तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी ने एक्टर विजय की पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया और वहां की सरकार में शामिल हो गई।
अभी डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। वह समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बाद कांग्रेस का तीसरा सहयोगी दल है, मगर अब वो ना तो सत्ता पक्ष में बैठेगा और ना ही विपक्ष के साथ। सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होगी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
हालांकि उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने लगातार यह प्रचार किया कि सीपीआईएम और भाजपा के बीच कोई समझौता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप विपक्षी एकता की भावना को कमजोर करते हैं और कांग्रेस को इस पर सफाई देनी चाहिए।
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दूसरी ओर तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी डीएमके ने भी बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। पार्टी कांग्रेस से नाराज है क्योंकि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दिया। डीएमके ने इसे विश्वासघात बताते हुए कहा कि उसके कार्यकर्ता अभी भी इस फैसले से आहत हैं।
हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा को जवाब देते हुए कहा कि उसे विपक्ष पर टिप्पणी करने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैठक में कौन शामिल होगा और कौन नहीं, इस पर अटकलें लगाने के बजाय बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
Edited By : Chetan Gour