2026 का फीफा विश्व कप इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।
फुटबॉल का सबसे बड़ा उत्सव 11 जून से शुरू होगा, जब पहली बार यह टूर्नामेंट तीन उत्तर अमेरिकी देशों—मेक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा—द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाएगा।
इस बार भाग लेने वाले देशों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर होगी।
1998 से अब तक विश्व कप में 32 टीमें शामिल होती थीं, जिन्हें आठ समूहों में चार-चार के हिसाब से बांटा जाता था। इससे पहले 1982 से 1994 के बीच यह संख्या 24 थी।
लेकिन अपनी 96 साल की इतिहास में पहली बार, फीफा ने भाग लेने वाली टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 कर दी है। यह निर्णय जनवरी 2017 में फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो द्वारा अनुमोदित किया गया था।
इस बढ़ी हुई संख्या के साथ चार नए देशों को पहली बार विश्व कप में खेलने का मौका मिला है — केप वर्डे, कुराकाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान। यह 2006 में जर्मनी विश्व कप के बाद सबसे अधिक नई टीमों की भागीदारी है, जब छह नई टीमें शामिल हुई थीं।
इस विस्तार के चलते टूर्नामेंट का प्रारूप भी बदला गया है। अब ग्रुप स्टेज में 12 समूह होंगे (A से L तक), जिनमें प्रत्येक में चार-चार टीमें होंगी।
इस बदलाव का प्रभाव नॉकआउट चरण पर भी पड़ेगा, जहां अब टीमें ‘राउंड ऑफ 32’ से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी। पहले यह चरण ‘राउंड ऑफ 16’ से शुरू होता था।
इस चरण तक पहुंचने के लिए टीमों को अपने समूह में पहले दो स्थानों में रहना होगा, या फिर शीर्ष रैंकिंग वाले तीसरे स्थान की टीमों में शामिल होना पड़ेगा।
फीफा की मिनी-लीग में शीर्ष आठ स्थान पाने वाली टीमें स्वतः ही ग्रुप A, B, D, E, G, I, K या L के विजेताओं के खिलाफ खेलेंगी।
कुल मिलाकर, इस बार विश्व कप में 104 मैच खेले जाएंगे। यह अब तक के किसी भी विश्व कप से अधिक है।
इसके अलावा, 2030 में प्रतियोगिता की शताब्दी मनाने के लिए इस प्रारूप को और विस्तारित करने का प्रस्ताव भी है। दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ ‘कॉनमेबोल’ ने सुझाव दिया है कि स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को में आयोजित होने वाले उस संस्करण में 64 टीमें शामिल की जाएं।
फिलहाल, 2026 की टीमें इस ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत कर रही हैं।