शेयर बाजार के साथ-साथ रुपए ने भी दिखाया दम, डॉलर को दिखाई असली ताकत
TV9 Bharatvarsh June 12, 2026 07:43 PM

मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के बीच भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 65 पैसे की बढ़त के साथ 95.20 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.85 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. रुपये में आई इस तेजी को हाल के दिनों की सबसे महत्वपूर्ण मजबूती के रूप में देखा जा रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मिला फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये को मजबूती मिलने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है. मिडिल ईस्ट में शांति की संभावनाओं के कारण निवेशकों को उम्मीद है कि तेल आपूर्ति पर दबाव कम होगा. इससे ब्रेंट क्रूड और अन्य प्रमुख तेल बेंचमार्क की कीमतों में नरमी देखने को मिली.

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो देश का आयात बिल घटता है और विदेशी मुद्रा की मांग कम होती है. इसका सीधा फायदा रुपये को मिलता है और वह डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है.

निवेशकों का बढ़ा भरोसा

बाजार जानकारों के अनुसार, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संभावित समझौते की खबरों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है. इसके चलते जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ा है और उभरते बाजारों की मुद्राओं को समर्थन मिला है. भारतीय रुपया भी इसी सकारात्मक माहौल का लाभ उठाने में सफल रहा.

विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में सुधार और घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी ने भी रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई. बेहतर वैश्विक संकेतों के कारण निवेशकों का रुझान भारतीय बाजारों की ओर बढ़ा है.

आगे क्या रह सकती है दिशा?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी. यदि क्षेत्र में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है और तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो रुपये को और मजबूती मिल सकती है.

हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. किसी भी नए भू-राजनीतिक तनाव या तेल की कीमतों में अचानक उछाल से रुपये पर फिर दबाव बन सकता है.

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

रुपये की मजबूती को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. मजबूत रुपया आयात लागत को कम करने में मदद करता है और महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण रख सकता है. इसके अलावा, ऊर्जा आयात पर निर्भर उद्योगों को भी राहत मिल सकती है. फिलहाल बाजार की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर बनी हुई है, जो आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगे.

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